
त्योहारभारतीय · हिंदू
बतुकम्मा
Bathukamma
अगली तारीख़
शनिवार, 10 अक्टूबर 2026
संक्षेप में
बतुकम्मा हिंदू पंचांग के अनुसार मनाया जाने वाला त्योहार है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।
कथा
बतुकम्मा तेलंगाना का फूलों का बड़ा त्योहार है। इसके केंद्र में माँ गौरी हैं, और साथ ही महिलाओं, मौसमी फूलों, पानी और खेती-बाड़ी वाली धरती का गहरा रिश्ता भी। नौ दिन तक महिलाएँ आसपास मिलने वाले फूलों को गोल परतों में एक के ऊपर एक सजाकर रंग-बिरंगा बतुकम्मा बनाती हैं। फिर टोलियों में जुटकर लोकगीत गाती हैं और उसके चारों ओर ताल में घेरा बनाकर घूमती हैं। सबसे बड़ा दिन सद्दुला बतुकम्मा का होता है। उस दिन सजे हुए फूल जुलूस में ले जाकर तालाब या किसी और जलाशय में विसर्जित किए जाते हैं। तेलंगाना की परंपरा इस त्योहार को माँ गौरी, उर्वरता, परिवार की कुशलता और बरसात के बाद फिर से खिलते जीवन से जोड़ती है। फूल, गीत और यह मिलना-जुलना वहीं की धरती से उपजे हैं। इसीलिए आज बतुकम्मा तेलंगाना की पहचान का मज़बूत प्रतीक है, और साझा सांस्कृतिक स्मृति को सहेजने में महिलाओं की भूमिका का भी।
Gujarati household practice के आधार पर
महत्व
बतुकम्मा का महत्व भक्ति, परिवार की परंपरा और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।
कैसे मनाते हैं
पीतल की थाली में फूलों की परतें सजाई जाती हैं, और नौवें दिन, सद्दुला बतुकम्मा पर, यह सजावट सबसे ऊँची होती है। शाम को रेशमी कपड़ों में महिलाएँ इसके चारों ओर घूमकर ताल पर ताली बजाती हैं, और गीत सवाल-जवाब की तरह गाए जाते हैं। अंत में यह तालाब में जाती है, और फूल उसी पानी में लौट जाते हैं जहाँ से आए थे।
Gujarati household practice के आधार पर
अलग-अलग इलाक़ों में
बतुकम्मा लगभग सिर्फ़ तेलंगाना का त्योहार है, सबसे ज़्यादा वारंगल और करीमनगर के आसपास के ज़िलों में। ये नौ दिन नवरात्रि के साथ चलते हैं और दुर्गाष्टमी से एक दिन पहले पूरे होते हैं, इसलिए एक घर दोनों मना सकता है।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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