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भवनाथ मेला

Bhavnath Mela · गिरनार महाशिवरात्रि मेला

अगली तारीख़

शनिवार, 6 मार्च 2027

सूर्योदय के समय की तिथि
कृष्ण त्रयोदशी12:03 तक
नक्षत्र
धनिष्ठाअगले दिन 06:41 तक
मास
फाल्गुनअमांत पंचांग में माघ
सूर्योदय
06:56सूर्यास्त 18:46
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संक्षेप में

गिरनार की तलहटी में शिवरात्रि पर पूरे होते पाँच दिन के मेले में आधी रात नागा साधु उतरकर रवेड़ी निकालते हैं।

कथा

भवनाथ महादेव का मंदिर गिरनार की तलहटी में है, जहाँ से पहाड़ की चढ़ाई शुरू होती है। महाशिवरात्रि से पहले के पाँच दिन यहाँ का मैदान अखाड़ों से भर जाता है। शिवरात्रि की रात नागा साधु मृगी कुंड में स्नान करते हैं और फिर रवेड़ी निकालते हैं। रवेड़ी यानी शंख, ढोल और मशालों के साथ मेले के बीच से गुज़रने वाला साधुओं का जुलूस, जो आधी रात के निशीथ काल में निकलता है। गिरनार पश्चिम भारत के सबसे पुराने तपस्थलों में से एक है, जहाँ साधना आज तक रुकी नहीं। और पूरे साल में यह साधु परंपरा सबसे ज़्यादा इसी रात दिखाई देती है।

महत्व

गुजराती साल में अखाड़े सबके सामने दिखें, ऐसा यही एक मौक़ा है। मेले में जाने वाले ज़्यादातर लोगों के लिए यह रवेड़ी ही मेला है।

कैसे मनाते हैं

मृगी कुंड का स्नान रवेड़ी से पहले होता है। गिरनार चढ़ने वाले यात्री अगले दिन भोर होने से पहले चढ़ाई शुरू कर देते हैं।

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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