
त्योहारगुजराती · हिंदू
चैत्र नवरात्रि
Chaitra Navratri
अगली तारीख़
बुधवार, 7 अप्रैल 2027
- सूर्योदय के समय की तिथि
- शुक्ल एकमअगले दिन 04:28 तक
- नक्षत्र
- रेवती18:25 तक
- मास
- चैत्र
- सूर्योदय
- 06:25सूर्यास्त 18:58
संक्षेप में
चैत्र नवरात्रि हिंदू पंचांग के अनुसार मनाया जाने वाला त्योहार है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।
कथा
चैत्र नवरात्रि चैत्र शुक्ल एकम से शुरू होती है। देवी की उपासना की बड़ी नवरात्रियों में से यह एक है। भक्त माँ दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा करते हैं। मान्यता है कि इन नौ रातों में भक्त पहले भीतर की शक्ति और संयम साधता है, और धीरे-धीरे ज्ञान और आध्यात्मिक स्पष्टता तक पहुँचता है। उत्तर भारत की कई परंपराओं में यह नवरात्रि राम नवमी पर पूरी होती है, इसलिए शक्ति की उपासना भगवान राम के जन्म से जुड़ जाती है। विधि की शुरुआत घटस्थापना या कलश स्थापना से होती है। पवित्र कलश स्थापित किया जाता है, कई जगह जौ बोए जाते हैं और दीया लगातार जलाए रखा जाता है। रोज़ देवी के पाठ, आरती और उपवास होते हैं। कई परिवारों में अष्टमी या नवमी के आसपास कन्या पूजन होता है। चैत्र नवरात्रि वसंत ऋतु में आती है, और कई क्षेत्रीय पंचांगों में इसी समय नया साल भी शुरू होता है। इसलिए इस त्योहार में नई शुरुआत का भाव ख़ास है।
Devi Mahatmya के आधार पर
महत्व
चैत्र नवरात्रि भक्ति और पारिवारिक परंपरा का त्योहार है, और इसके साथ आध्यात्मिक और मौसमी अर्थ भी जुड़ा है।
कैसे मनाते हैं
शारदीय नवरात्रि के मुक़ाबले चैत्र नवरात्रि ज़्यादा शांति से मनाई जाती है, और इसमें गरबा भी कम होता है। पहले दिन एक पात्र में जौ बोए जाते हैं, और नौ दिन तक उनकी देखभाल की जाती है। कुछ दिन या पूरे नौ दिन उपवास रखा जाता है। नौवाँ दिन ही राम नवमी है।
Gujarati household practice के आधार पर
अलग-अलग इलाक़ों में
उत्तर भारत में दोनों में से चैत्र नवरात्रि बड़ी मानी जाती है, और शारदीय नवरात्रि रामलीला का समय होती है। गुजरात और बंगाल में इसका उलटा है। दक्षिण भारत में इसे वसंत नवरात्रि कहते हैं। जम्मू में वैष्णो देवी के दर्शन और हिमालय की तलहटी के चैत्र मेले इन्हीं दिनों पड़ते हैं।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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