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क्रिसमस

Christmas

अगली तारीख़

शुक्रवार, 25 दिसंबर 2026

सूर्योदय के समय की तिथि
कृष्ण द्वितीया23:26 तक
नक्षत्र
पुनर्वसु22:49 तक
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पौषअमांत पंचांग में मार्गशीर्ष
सूर्योदय
07:16सूर्यास्त 18:02
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संक्षेप में

क्रिसमस यीशु मसीह के जन्म की याद में मनाया जाता है, जिन्हें ईसाई मसीहा और परमेश्वर का पुत्र मानते हैं।

कथा

क्रिसमस यीशु मसीह के जन्म की याद में मनाया जाता है। ईसाई उन्हें मसीहा और परमेश्वर का पुत्र मानते हैं। सुसमाचारों के अनुसार मरियम और यूसुफ़ यात्रा करके बेथलेहम पहुँचे, और वहीं बहुत साधारण हालात में यीशु का जन्म हुआ। बालक यीशु को चरनी में लिटाया गया। स्वर्गदूत ने शुभ समाचार दिया तो चरवाहे उन्हें देखने आए। मत्ती का सुसमाचार आगे बताता है कि एक तारा ज्ञानियों को राह दिखाता रहा, और वे उपहार लेकर पहुँचे। यीशु के जन्म की ठीक-ठीक ऐतिहासिक तारीख़ ज्ञात नहीं है। शुरुआती सदियों में ईसाई जगत के बड़े हिस्से में 25 दिसंबर इस त्योहार का मुख्य दिन बन गया। कई चर्चों में क्रिसमस से पहले एडवेंट आता है, जो प्रतीक्षा के दिन हैं। क्रिसमस पर ख़ास प्रार्थना होती है, कैरल गाए जाते हैं, यीशु के जन्म की झाँकी सजती है, रोशनी होती है, परिवार साथ बैठकर खाना खाते हैं और उपहार दिए जाते हैं। इस सारी सजावट के पीछे ईसाइयों का यह विश्वास है कि परमेश्वर विनम्र होकर आम इंसान के जीवन में आए, और आशा, शांति, मेल-मिलाप और प्रेम का संदेश लाए।

Gujarati household practice के आधार पर

महत्व

क्रिसमस इसे मनाने वाले समुदाय के लिए ख़ास है, और इससे धर्म, परिवार और संस्कृति की परंपरा बनी रहती है।

कैसे मनाते हैं

आधी रात की प्रार्थना, क्रिसमस ट्री, रोशनी और उपहार इसकी पहचान हैं। भारत में सबसे धूमधाम गोवा, केरल और पूर्वोत्तर में होती है, जहाँ एडवेंट के दिनों में घरों के बाहर तारे के आकार की कंदीलें टाँगी जाती हैं। गुजरात के चर्चों में कैरल गाए जाते हैं और आधी रात की प्रार्थना होती है। पूरे देश में इस दिन सार्वजनिक छुट्टी रहती है।

Gujarati household practice के आधार पर

अलग-अलग इलाक़ों में

जूलियन कैलेंडर मानने वाले ऑर्थोडॉक्स चर्च, जैसे रूस, सर्बिया और जॉर्जिया के चर्च तथा इथियोपियाई और कॉप्टिक चर्च, क्रिसमस 7 जनवरी को मनाते हैं। भारत में इस दिन राष्ट्रीय अवकाश होता है, और सबसे ज़्यादा धूमधाम केरल, गोवा, मुंबई और पूर्वोत्तर राज्यों में रहती है। केरल की सीरियन ईसाई परंपरा यूरोप की ज़्यादातर ईसाई परंपराओं से पुरानी है।

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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