
त्योहारभारतीय · हिंदू
दही हांडी
Dahi Handi · गोपालकाला
अगली तारीख़
गुरुवार, 26 अगस्त 2027
- सूर्योदय के समय की तिथि
- कृष्ण नवमी17:39 तक
- नक्षत्र
- रोहिणी11:42 तक
- मास
- भाद्रपदअमांत पंचांग में श्रावण
- सूर्योदय
- 06:18सूर्यास्त 19:04
संक्षेप में
दही हांडी हिंदू पंचांग के अनुसार मनाया जाने वाला त्योहार है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।
कथा
दही हांडी में श्रीकृष्ण के बचपन की सबसे प्यारी लीलाओं में से एक धूमधाम भरे सार्वजनिक जश्न का रूप ले लेती है। गोकुल के बाल कृष्ण को माखन चोर के रूप में याद किया जाता है। उन्हें माखन और दही बहुत भाता था, और लोग घरों में जो मटकियाँ ऊँचाई पर टाँगते थे, उन तक वे अक्सर अपने सखाओं की मदद से पहुँच जाते थे। आज का त्योहार उसी दृश्य को फिर से जीवित करता है। गोविंदाओं की टोलियाँ मानव पिरामिड बनाती हैं, और गली के ऊपर ऊँचाई पर बँधी मिट्टी की हांडी तक पहुँचकर उसे फोड़ती हैं। यह आम तौर पर जन्माष्टमी के अगले दिन मनाया जाता है, और महाराष्ट्र में इसकी ख़ास धूम रहती है। पिरामिड की हर परत पर तालमेल, भरोसा और एक-दूसरे को सँभलकर सहारा देना ज़रूरी होता है। इसलिए नटखट बाल-लीला मिल-जुलकर काम करने का प्रदर्शन बन जाती है। गीतों, ढोल और कृष्ण के जयकारों के बीच यह आयोजन चलता है, पर इसके भीतर भक्ति का भाव है, जो गोकुलवासियों और उनके प्यारे कृष्ण के आत्मीय, आनंद भरे रिश्ते को याद करता है।
महत्व
दही हांडी का महत्व भक्ति, परिवार की परंपरा और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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