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व्रतगुजराती · हिंदू

धरो आठम

Dharo Atham

अगली तारीख़

शनिवार, 19 सितंबर 2026

3 दिन बाद
सूर्योदय के समय की तिथि
शुक्ल अष्टमी15:27 तक
नक्षत्र
मूलअगले दिन 01:42 तक
मास
भाद्रपद
सूर्योदय
06:26सूर्यास्त 18:40
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संक्षेप में

धरो आठम हिंदू पंचांग के अनुसार रखा जाने वाला व्रत है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।

कथा

धरो आठम बरसात के मौसम में आने वाला गुजरात का व्रत है। इसमें धरो की पूजा होती है। धरो यानी दूर्वा के नाम से जानी जाने वाली पवित्र हरी घास। यह घास काट दी जाए तब भी टिकी रहती है, फैलती है और फिर उग आती है। इसलिए यह वंश के चलते रहने, संतान सुख और परिवार की लंबी परंपरा का प्रतीक बन गई। भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को कई गुजराती समाजों में महिलाएँ उगी हुई धरो या धरो के गुच्छे की पूजा करती हैं। वे जल, कुमकुम, अनाज या नैवेद्य चढ़ाती हैं, और बच्चों की सेहत और घर की समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं। यह दिन राधाष्टमी के पवित्र दिनों के साथ ही आता है, और कभी-कभी भारत के दूसरे हिस्सों की दूर्वाष्टमी की परंपरा से भी जोड़ा जाता है। धरो आठम के पीछे हर जगह सुनाई जाने वाली कोई एक कथा नहीं है। यह व्रत मुख्य रूप से घर की परंपरा से ही चलता आया है। एक साधारण पर मज़बूत पौधे का सम्मान करके, पीढ़ी-दर-पीढ़ी फलते-फूलते जीवन का स्वागत करने का यह तरीक़ा है।

महत्व

धरो आठम भक्ति और पारिवारिक परंपरा से जुड़ा व्रत है, और इसमें आध्यात्मिक और मौसमी अर्थ भी है।

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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