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गणेश चतुर्थी

Ganesh Chaturthi

अगली तारीख़

शनिवार, 4 सितंबर 2027

सूर्योदय के समय की तिथि
शुक्ल चतुर्थी12:26 तक
नक्षत्र
चित्रा14:49 तक
मास
भाद्रपद
सूर्योदय
06:21सूर्यास्त 18:55
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संक्षेप में

गणेश चतुर्थी विघ्नहर्ता गणेश जी का त्योहार है, जिनकी पूजा बुद्धि के लिए और हर शुभ शुरुआत से पहले होती है।

कथा

गणेश चतुर्थी विघ्नहर्ता, बुद्धि के दाता और शुभ आरंभ के देवता गणेश जी का त्योहार है। पुराणों में गणेश जी के जन्म की एक से अधिक कथाएँ हैं, पर सबसे प्रसिद्ध कथा यह है कि माता पार्वती ने एक बालक की रचना की और उसे अपने द्वार पर पहरे के लिए बिठा दिया। भगवान शिव लौटे तो बालक ने उन्हें नहीं पहचाना और भीतर जाने से रोक दिया। इसी पर संघर्ष हुआ और बालक का सिर कट गया। माता पार्वती का दुख और क्रोध देखकर शिव जी ने बालक को हाथी का सिर लगाकर फिर से जीवित किया, उन्हें गणेश के रूप में अपनाया और हर पूजा में सबसे पहला स्थान दिया। इसलिए इस त्योहार पर गणेश जी के जन्म के साथ यह भी याद किया जाता है कि कोई भी महत्वपूर्ण काम शुरू करने से पहले उन्हीं का स्मरण होता है। घरों और सार्वजनिक मंडपों में मिट्टी की प्रतिमा स्थापित की जाती है, मोदक और दूर्वा चढ़ाई जाती है, स्तुति-प्रार्थना होती है और आरती उतारी जाती है। तय किए गए दिन पूरे होने पर प्रतिमा को शोभायात्रा के साथ ले जाकर विसर्जित किया जाता है, मानो मिट्टी का वह रूप फिर तत्वों में मिल जाता है।

Shiva Purana के आधार पर

महत्व

गणेश चतुर्थी का महत्व भक्ति, परिवार की परंपरा और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।

कैसे मनाते हैं

घर में या सार्वजनिक पंडाल में मिट्टी की प्रतिमा स्थापित होती है, और गणपति एक, तीन या दस दिन विराजते हैं। मोदक और लड्डू का भोग लगता है। आख़िरी दिन प्रतिमा को शोभायात्रा में ले जाकर विसर्जित किया जाता है। विदाई के समय ऊँची आवाज़ में गणपति को अगले साल फिर आने का न्योता दिया जाता है।

Gujarati household practice के आधार पर

अलग-अलग इलाक़ों में

सबसे बड़ा उत्सव महाराष्ट्र में होता है। सार्वजनिक पंडाल तिलक के दौर में शुरू हुए, जिनसे घर की पूजा पूरे समाज का उत्सव बन गई। वहाँ और गुजरात में दस दिन, और कई घरों में डेढ़ दिन गणपति विराजते हैं। दक्षिण में विनायक चतुर्थी ज़्यादा शांति से, कोझुकट्टई के भोग के साथ मनाई जाती है। अब ज़्यादा से ज़्यादा विसर्जन नदी के बजाय कुंडों में होता है, और प्रतिमाएँ प्लास्टर की जगह मिट्टी की बनती हैं।

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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