
त्योहारभारतीय · हिंदू
गणगौर
Gangaur
अगली तारीख़
शुक्रवार, 9 अप्रैल 2027
- सूर्योदय के समय की तिथि
- शुक्ल तृतीयाअगले दिन 01:32 तक
- नक्षत्र
- भरणी17:11 तक
- मास
- चैत्र
- सूर्योदय
- 06:23सूर्यास्त 18:59
संक्षेप में
गणगौर हिंदू पंचांग के अनुसार मनाया जाने वाला त्योहार है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।
कथा
गणगौर राजस्थान का वसंत का त्योहार है, जो गौरी यानी माँ पार्वती और भगवान शिव के मिलन को समर्पित है। परंपरा के अनुसार नाम में 'गण' का अर्थ शिव है और 'गौर' का अर्थ गौरी। इस त्योहार के पीछे माँ पार्वती के अटल तप और शिव जी से उनके विवाह का आदर्श है। इसीलिए सुहागिन महिलाएँ पति की कुशलता और लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं, और कुँवारी लड़कियाँ प्यार करने वाला योग्य वर माँगती हैं। गणगौर की पूजा होली के बाद शुरू होकर चैत्र शुक्ल तृतीया तक चलती है। इन दिनों महिलाएँ ईसर और गौरी की प्रतिमाओं की पूजा करती हैं, हाथों में मेहंदी रचाती हैं, पानी भरकर लाती हैं, पारंपरिक गीत गाती हैं और ख़ास प्रसाद बनाती हैं। आख़िरी दिन सुंदर सजी प्रतिमाओं की रंग-बिरंगी सवारी गलियों से निकलती है। यह शिव जी के पास जाती गौरी की विदाई की याद दिलाती है। यह मौसम वसंत का और खेती में नई जान का भी है। इसलिए गणगौर में दांपत्य के भाव के साथ उर्वरता, समृद्धि, महिलाओं का आपसी सखीपन और धरती की नई ताज़गी भी घुली है।
Gujarati household practice के आधार पर
महत्व
गणगौर का महत्व भक्ति, परिवार की परंपरा और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।
कैसे मनाते हैं
ईसर और गौरी की मिट्टी की प्रतिमाएँ बनाकर अठारह दिन घर में रखी जाती हैं। लड़कियाँ हर सुबह सिर पर पानी भरकर उनके पास लाती हैं और गीत गाती हैं। मारवाड़ में घुड़लिया के दीये घुमाए जाते हैं। आख़िरी दिन जयपुर और उदयपुर में सवारी निकलती है, जो झील पर जाकर पूरी होती है।
Gujarati household practice के आधार पर
अलग-अलग इलाक़ों में
गणगौर सबसे ज़्यादा राजस्थान में मनाई जाती है, जहाँ जयपुर और उदयपुर में सवारी पानी तक जाती है। साथ में गुजरात, मध्य प्रदेश और ब्रज के कुछ हिस्सों में भी यह मनाई जाती है। बंगाल और दक्षिण भारत में गणगौर नहीं मनाई जाती। वहाँ गौरी माँ साल के दूसरे समय पर आती हैं।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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