
व्रतगुजराती · हिंदू
गौरी गणेश चतुर्थी
Gauriganesha Chaturthi · गौरी गणेश चौथ
अगली तारीख़
बुधवार, 10 फ़रवरी 2027
- सूर्योदय के समय की तिथि
- शुक्ल चतुर्थीअगले दिन 03:04 तक
- नक्षत्र
- उत्तरा भाद्रपदाअगले दिन 04:55 तक
- मास
- माघ
- सूर्योदय
- 07:14सूर्यास्त 18:33
संक्षेप में
गौरी गणेश चतुर्थी हिंदू पंचांग के अनुसार रखा जाने वाला व्रत है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।
कथा
गुजराती पंचांग की परंपरा में जिन चतुर्थियों को ख़ास नाम मिले हैं, उनमें से एक गौरी गणेश चतुर्थी है। यह चतुर्थी शुक्ल पक्ष में आती है। इस दिन विघ्नहर्ता गणेश जी के साथ माँ गौरी का भी शुभ स्मरण होता है। माँ गौरी पार्वती जी का ही एक रूप हैं और गणेश जी की माता हैं। माँ और बेटे की यह जोड़ी घर-घर की जानी-पहचानी तस्वीर जैसी लगती है। माँ गौरी मंगल, ममता भरी शक्ति और परिवार के कल्याण की प्रतीक हैं, तो गणेश जी बुद्धि और शुभ शुरुआत के। भक्त गणेश जी को दूर्वा, फूल, दीया और मिठाई चढ़ाते हैं, और घर में मेल-जोल और समृद्धि बनी रहे, इस प्रार्थना के साथ माँ गौरी को याद करते हैं। भाद्रपद की धूमधाम वाली गणेश चतुर्थी जैसा यह आयोजन नहीं है। यह व्रत शांति से रखा जाता है, और मुख्य रूप से पंचांग और परिवार की व्रत परंपरा में ही चलता आया है। शुक्ल पक्ष की शुरुआत में ही माँ की कृपा और विवेक भरी बुद्धि, दोनों को याद करना, इसी में इस दिन का महत्व है।
महत्व
गौरी गणेश चतुर्थी का महत्व भक्ति में, पारिवारिक परंपरा में और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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