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गुड फ़्राइडे

Good Friday

अभी कोई नियम नहीं

इसका नियम अभी किसी ने नहीं लिखा है, इसलिए कैलेंडर इसे किसी तारीख़ पर नहीं दिखाता। मनगढ़ंत तारीख़ के साथ नाम दिखाने से अच्छा है कि सिर्फ़ नाम दिखे।

संक्षेप में

गुड फ़्राइडे यीशु मसीह के क्रूस पर चढ़ाए जाने और उनकी मृत्यु को गंभीरता से याद करने का ईसाइयों का दिन है, और सुसमाचारों के अनुसार अंतिम भोज के बाद यीशु को गिरफ़्तार किया गया, धर्मगुरुओं ने उनसे पूछताछ की और फिर उन्हें रोमी राज्यपाल पोंतियुस पीलातुस के सामने पेश किया गया।

कथा

गुड फ़्राइडे यीशु मसीह के क्रूस पर चढ़ाए जाने और उनकी मृत्यु को गंभीरता से याद करने का ईसाइयों का दिन है। सुसमाचारों के अनुसार अंतिम भोज के बाद यीशु को गिरफ़्तार किया गया। धर्मगुरुओं ने उनसे पूछताछ की और फिर उन्हें रोमी राज्यपाल पोंतियुस पीलातुस के सामने पेश किया गया। उन्हें क्रूस की सज़ा सुनाई गई। उनसे क्रूस उठवाकर उन्हें गोलगोथा की ओर ले जाया गया, और वहीं उनकी मृत्यु हुई। ईसाई इस घटना को यीशु की पूरी शिक्षा के संदर्भ में समझते हैं। हिंसा का जवाब हिंसा से देने के बजाय यीशु ने दुख सहना स्वीकार किया। ईसाइयों का विश्वास है कि उनकी मृत्यु क्षमा, मेल-मिलाप और उद्धार से जुड़ी है। ‘गुड’ का अर्थ अच्छा है, पर इसका मतलब यह नहीं कि वह दुख अपने आप में आनंद की बात है। इस नाम के पीछे यह धार्मिक समझ है कि उस दिन जो हुआ, उसी से उद्धार मिला। चर्चों में इस दिन मौन रखा जाता है, धर्मग्रंथ पढ़ा जाता है, प्रार्थना होती है, क्रूस-मार्ग की भक्ति होती है और क्रूस को नमन किया जाता है। यह शोक और आत्मचिंतन का शांत दिन है, जो ईस्टर की आशा की ओर ले जाता है।

Gujarati household practice के आधार पर

महत्व

गुड फ़्राइडे का पालन करने वाले समाज के लिए यह अहम दिन है। इससे धर्म, परिवार और संस्कृति की परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी बनी रहती है।

कैसे मनाते हैं

दोपहर में उस घड़ी प्रार्थना होती है, जिसे परंपरा यीशु की मृत्यु की घड़ी मानती है। इसमें दुख-भोग का वर्णन पढ़ा जाता है और क्रूस को नमन होता है। बहुत लोग उपवास रखते हैं और मांस नहीं खाते। वेदी ख़ाली कर दी जाती है और रविवार तक चर्च सूना रहता है।

Gujarati household practice के आधार पर

अलग-अलग इलाक़ों में

पूरे भारत में इस दिन सार्वजनिक छुट्टी रहती है, और केरल तथा गोवा में लोग सड़कों पर क्रूस-मार्ग की यात्रा निकालते हैं। फ़िलीपींस, स्पेन और लैटिन अमेरिका के कुछ हिस्सों में इतने बड़े जुलूस निकलते हैं कि वैसे और कहीं नहीं दिखते। ऑर्थोडॉक्स चर्च यह दिन अपनी ईस्टर गणना के अनुसार मनाते हैं।

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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