त्योहारजैन · श्वेतांबर
ज्ञान पंचमी
Gyan Panchami
अगली तारीख़
शनिवार, 14 नवंबर 2026
- सूर्योदय के समय की तिथि
- शुक्ल पंचमी23:24 तक
- नक्षत्र
- पूर्वाषाढा20:24 तक
- मास
- कार्तिक
- सूर्योदय
- 06:51सूर्यास्त 17:56
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संक्षेप में
कई श्वेतांबर जैन संघों में दीवाली के बाद पाँचवें दिन मनाई जाने वाली ज्ञान पंचमी ज्ञान, शास्त्रों और उन्हें सँभालकर रखने वाले गुरुओं को समर्पित दिन है।
कथा
कई श्वेतांबर जैन संघों में दीवाली के बाद पाँचवें दिन ज्ञान पंचमी मनाई जाती है। यह दिन ज्ञान, शास्त्रों और उन शास्त्रों को सँभालकर रखने वाले गुरुओं का है। जैन धर्म में सम्यक् दर्शन और सम्यक् चारित्र के साथ सम्यक् ज्ञान को मोक्ष-मार्ग का ज़रूरी आधार माना जाता है। इस दिन पवित्र पुस्तकें, पांडुलिपियाँ और पढ़ाई की सामग्री साफ़ करके, आदर से सजाकर उनकी पूजा की जाती है। यह पूजा इसलिए नहीं होती कि पुस्तक स्वयं भगवान है। उसमें लिखा उपदेश आत्मा को अज्ञान से बाहर निकलने की राह दिखाता है, इसलिए उसकी पूजा होती है। मंदिरों और पाठशालाओं में शास्त्र-पाठ, प्रवचन और विशेष पूजा होती है, और विद्यार्थी फिर से नियमित पढ़ाई की ओर मन लगाते हैं। जैन समाज ने पांडुलिपियों के भंडार और विद्वत्ता की परंपरा बचाए रखने को कितना महत्व दिया, इसकी झलक भी इस त्योहार में मिलती है। ज्ञान पंचमी पढ़ाई को आध्यात्मिक ज़िम्मेदारी बना देती है। सच्चा ज्ञान वही है जो दृष्टि साफ़ करे, विनम्रता लाए और आचरण सुधारे।
Gujarati household practice के आधार पर
महत्व
ज्ञान पंचमी इसे मनाने वाले समाज के लिए महत्वपूर्ण है, और धर्म, परिवार व संस्कृति की परंपरा को बनाए रखने में मदद करती है।
कैसे मनाते हैं
पांडुलिपियाँ बाहर निकालकर, धूल पोंछकर सजाई जाती हैं, और संघ देख पाता है कि मंदिर में क्या-क्या सुरक्षित है। उपवास रखा जाता है, और ज्ञान की पूजा पाँच-पाँच चीज़ों से होती है, जैसे पाँच दीपक, पाँच मिठाइयाँ और पाँच तरह के अनाज। उस दिन कुछ भी हल्के ढंग से लिखा या पढ़ा नहीं जाता।
Gujarati household practice के आधार पर
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