
एकादशीगुजराती · हिंदू
इंदिरा एकादशी
Indira Ekadashi
अगली तारीख़
मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026
- सूर्योदय के समय की तिथि
- कृष्ण एकादशीअगले दिन 00:34 तक
- नक्षत्र
- आश्लेषा22:17 तक
- मास
- आश्विनअमांत पंचांग में भाद्रपद
- सूर्योदय
- 06:31सूर्यास्त 18:23
संक्षेप में
इंदिरा एकादशी हिंदू पंचांग के अनुसार रखा जाने वाला एकादशी व्रत है, जिसकी तिथि और रीति-रिवाज इलाक़े और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।
कथा
इंदिरा एकादशी पितरों की याद से ख़ास तौर पर जुड़ी है, क्योंकि इसकी कथा राजा इंद्रसेन और उनके दिवंगत पिता की है। कथा है कि इंद्रसेन बड़े धर्मनिष्ठ राजा थे। एक दिन नारद मुनि उनके दरबार में आए। उन्होंने राजा को बताया कि आपके पिता यमलोक में कष्ट भोग रहे हैं, क्योंकि उनका एक धार्मिक कर्तव्य अधूरा रह गया था। नारद जी ने इंद्रसेन को सलाह दी कि वे इंदिरा एकादशी का व्रत विधि से करें और उसका पुण्य अपने पिता को अर्पित करें। राजा ने दशमी से ही व्रत की तैयारी की। उन्होंने भगवान विष्णु की पूजा की, परिवार के साथ एकादशी का उपवास रखा और व्रत का पुण्य पिता की मुक्ति के लिए अर्पित किया। कथा के अनुसार इस भक्ति से राजा के पिता यमलोक से मुक्त हुए और उच्च लोक को गए। कई पंचांगों में यह एकादशी पितृ पक्ष में आती है, इसलिए इसमें विष्णु भक्ति और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता सहज ही जुड़ जाती है। इसीलिए पूजा, उपवास, दान और पितरों का स्मरण इस व्रत के मुख्य अंग हैं।
Padma Purana के आधार पर
महत्व
इंदिरा एकादशी पितृ पक्ष में आती है, और यह व्रत अपने लिए नहीं, पितरों के लिए रखा जाता है। इसका पुण्य कुल के दिवंगत पूर्वजों को अर्पित किया जाता है, और इसीलिए इसका स्थान पितृ पक्ष में है।
उपवास
यह व्रत आश्विन कृष्ण पक्ष (अमांत पंचांग में भाद्रपद कृष्ण) में, पितृ पक्ष के भीतर आता है। इसका पुण्य परिवार के दिवंगत सदस्यों को अर्पित होता है, और यह श्राद्ध के बदले नहीं, उसके साथ रखा जाता है।
Gujarati household practice के आधार पर
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