
जयंतीगुजराती · हिंदू
जलाराम बापा जयंती
Jalaram Bapa Jayanti
अगली तारीख़
सोमवार, 16 नवंबर 2026
- सूर्योदय के समय की तिथि
- शुक्ल सप्तमीअगले दिन 04:20 तक
- नक्षत्र
- श्रवणअगले दिन 02:16 तक
- मास
- कार्तिक
- सूर्योदय
- 06:52सूर्यास्त 17:56
संक्षेप में
इस दिन वीरपुर के संत जलाराम बापा का जन्मदिन मनाया जाता है, जिन्हें भक्ति, सेवा और भूखों को भोजन कराने के लिए याद किया जाता है।
कथा
जलाराम बापा जयंती पर उन्नीसवीं सदी के गुजराती संत जलाराम बापा का जन्मदिन मनाया जाता है। उनका जन्म सौराष्ट्र के वीरपुर में हुआ था। बचपन से ही उनका मन व्यापार से ज़्यादा सेवा, तीर्थयात्रा और साधु-संतों की संगत में लगता था। पत्नी वीरबाई के साथ मिलकर उन्होंने यात्रियों, साधुओं और भूखे आए हर व्यक्ति को भोजन कराने की परंपरा शुरू की। इसमें जाति, समाज या अमीर-गरीब का कोई भेद नहीं था। वीरपुर की ‘जलाराम प्रसादी’ की परंपरा सदाव्रत के इसी आदर्श से पनपी। सदाव्रत यानी कभी न रुकने वाली, निःस्वार्थ अन्नसेवा। जलाराम बापा की कथाओं में विनम्रता, श्रीराम में आस्था और अपार उदारता केंद्र में हैं। भक्त ऐसे कई प्रसंग याद करते हैं जिनमें बापा की करुणा और प्रार्थना से लोगों को मदद मिली। इसलिए उनकी जयंती किसी व्यक्ति की महिमा के उत्सव से ज़्यादा सेवा का स्मरण है। दूसरों को भोजन कराना, चुपचाप दान देना और इंसान की सेवा को भगवान की सेवा मानना, यही इस दिन का संदेश है।
महत्व
जलाराम बापा जयंती का महत्व भक्ति, परिवार की परंपरा और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।
कैसे मनाते हैं
इस दिन वीरपुर भक्तों से भर जाता है और अन्नक्षेत्र बिना रुके चलता है। दूसरी जगहों के जलाराम मंदिरों में भी वैसा ही मुफ़्त भोजन होता है। विदेश में बसे कई गुजराती परिवार वीरपुर जाने के बजाय घर पर खाना बनाकर बाँटते हैं।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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