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जमशेदी नवरोज़

Jamshedi Navroz

अगली तारीख़

रविवार, 21 मार्च 2027

सूर्योदय के समय की तिथि
शुक्ल चतुर्दशी18:21 तक
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी22:06 तक
मास
फाल्गुन
सूर्योदय
06:42सूर्यास्त 18:52
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संक्षेप में

जमशेदी नवरोज़ बहुत से पारसियों और ज़रथुश्त्रियों का वसंत में आने वाला नया साल है, और फ़ारसी परंपरा इसे प्राचीन कथाओं के राजा जमशेद से जोड़ती है।

कथा

जमशेदी नवरोज़ बहुत से पारसियों और ज़रथुश्त्रियों का वसंत का नया साल है, और फ़ारसी परंपरा में यह प्राचीन कथाओं के राजा जमशेद से जुड़ा है। यह त्योहार वसंत विषुव पर आता है, जब दिन और रात लगभग बराबर होते हैं। इसीलिए प्रकृति में फिर से जागता जीवन इसके अर्थ का बड़ा हिस्सा है। बाद के फ़ारसी साहित्य में कहा गया है कि जमशेद ने व्यवस्था, समृद्धि और नई शुरुआत का एक उजला नया दिन स्थापित किया। इसी कारण पारसियों में 'जमशेदी' नाम ख़ूब चलता है। नवरोज़ से पहले घर साफ़ करके सजाए जाते हैं। लोग नए कपड़े पहनते हैं, प्रार्थना करते हैं, अगियारी में दर्शन को जाते हैं और साथ बैठकर त्योहार का भोजन करते हैं। मेज़ पर फूल, फल और शुभ चीज़ें सजाई जाती हैं, जो ताज़गी और बरकत का एहसास जगाती हैं। परिवार एक-दूसरे के घर मिलने जाते हैं और दान करते हैं। नौरोज़ तो ज़रथुश्त्री धर्म से बाहर के भी बहुत से समुदाय मनाते हैं, पर पारसी जीवन में जमशेदी नवरोज़ का अर्थ अलग है। इसमें फ़ारसी पूर्वजों की विरासत से नाता है, सृष्टि के प्रति आभार है, और अच्छे विचार, अच्छी वाणी और अच्छे कर्म से साल शुरू करने की आशा है।

Gujarati household practice के आधार पर

महत्व

जमशेदी नवरोज़ इसे मनाने वाले समुदाय के लिए अहम दिन है, और धर्म, परिवार और संस्कृति की परंपरा को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने में मदद करता है।

कैसे मनाते हैं

घर साफ़ होता है और दरवाज़े पर रंगोली बनती है। सुबह लोग नए कपड़े पहनकर अगियारी जाते हैं, फिर भोजन होता है। खाने में धनसाक और पात्रा नी मच्छी होती है, और दिन की मीठी शुरुआत सेव और दही से होती है। नवसारी और उदवाड़ा जैसे गुजरात के पारसी नगर यह त्योहार पूरे रीति-रिवाज से मनाते हैं।

Gujarati household practice के आधार पर

अलग-अलग इलाक़ों में

भारत के पारसी और ईरानी इसे विषुव के दिन ही मनाते हैं, चाहे उनका परिवार कैलेंडर की कोई भी गणना मानता हो। ईरान के लोग, अफ़ग़ान, कुर्द, अज़ेरी और मध्य एशियाई समुदाय इसे नौरोज़ के रूप में मनाते हैं। वहाँ यह ज़रथुश्त्री समुदाय से कहीं आगे, पूरे देश का नया साल है।

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