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एकादशीगुजराती · हिंदू

जया एकादशी

Jaya Ekadashi · Bhaimi Ekadashi

अगली तारीख़

बुधवार, 17 फ़रवरी 2027

सूर्योदय के समय की तिथि
शुक्ल एकादशी17:32 तक
नक्षत्र
आर्द्रा23:28 तक
मास
माघ
सूर्योदय
07:09सूर्यास्त 18:37
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संक्षेप में

जया एकादशी हिंदू पंचांग के अनुसार रखा जाने वाला एकादशी व्रत है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।

कथा

जया एकादशी की कथा है कि इंद्र की सभा में माल्यवान नाम के एक गंधर्व गायक और पुष्पवती नाम की एक अप्सरा रहते थे। एक बार गायन और नृत्य चल रहा था, तभी दोनों का ध्यान एक-दूसरे में खो गया और राजसभा की मर्यादा टूट गई। इस भूल पर इंद्र क्रोधित हुए, और उन्होंने दोनों को पिशाच बनकर हिमालय में कष्ट भोगने का शाप दे दिया। उसी दुख भरी दशा में एकादशी का दिन आया। उस दिन उन्हें ढंग का भोजन नहीं मिला, और वे रात भर जागते रहे। उन्होंने विधि से कोई व्रत नहीं लिया था, फिर भी कथा कहती है कि अनजाने में हुए इस उपवास और जागरण से वे पवित्र हो गए। द्वादशी के दिन शाप ख़त्म हुआ और दोनों को फिर से दिव्य रूप मिला। जब वे लौटे, तब इंद्र को पता चला कि जया एकादशी के प्रभाव से उन्हें मुक्ति मिली है। इसीलिए यह कथा एकादशी को ऐसा दिन बताती है, जब संयम, जागरण और भगवान विष्णु का स्मरण इंसान को मन के आवेग से और पुरानी भूलों के फल से ऊपर उठा सकता है।

Padma Purana के आधार पर

महत्व

मान्यता है कि यह व्रत भूत-प्रेत योनि से छुटकारा दिलाता है। इससे जुड़ी कथा एक गंधर्व गायक की है, जिसने अपना स्थान खोया और इसी उपवास से वापस पाया। यह व्रत माघ शुक्ल एकादशी को रखा जाता है।

उपवास

माघ शुक्ल एकादशी का यह व्रत शाप से छुटकारे के लिए रखा जाता है। कथा में यह शाप दो गायकों को मिला था, जो दरबार में लापरवाह हुए और इसकी सज़ा में पिशाच बना दिए गए।

Gujarati household practice के आधार पर

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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