
जयंतीगुजराती · हिंदू
कल्कि जयंती
Kalki Jayanti
अगली तारीख़
शनिवार, 7 अगस्त 2027
- सूर्योदय के समय की तिथि
- शुक्ल षष्ठी23:01 तक
- नक्षत्र
- हस्त06:25 तक
- मास
- श्रावण
- सूर्योदय
- 06:11सूर्यास्त 19:19
संक्षेप में
कल्कि जयंती हिंदू पंचांग के अनुसार मनाई जाने वाली जयंती है, जिसकी तिथि और रीति-रिवाज इलाक़े और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।
कथा
कल्कि जयंती भगवान विष्णु के कल्कि अवतार को समर्पित है। दशावतार की परंपरा में कल्कि भविष्य में आने वाले अंतिम अवतार हैं। दूसरे अवतारों की जयंतियों पर किसी बीती हुई घटना को याद किया जाता है, पर कल्कि जयंती ऐसी नहीं है। पुराणों के अनुसार भगवान कल्कि कलियुग के अंत में प्रकट होंगे, जब समाज की व्यवस्था और नैतिकता बहुत गिर चुकी होगी। उनका रूप एक तेजस्वी योद्धा का है, और अक्सर उन्हें सफ़ेद घोड़े पर सवार और हाथ में तलवार लिए दिखाया जाता है। मान्यता है कि वे विनाशकारी शक्तियों का अंत करेंगे, और धर्म की फिर से स्थापना और नए युग की शुरुआत के लिए संसार को तैयार करेंगे। इसलिए यह दिन पीछे नहीं, आगे की ओर देखता है। भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, कल्कि अवतार से जुड़े प्रसंग पढ़ते हैं और इस बात पर मनन करते हैं कि पतन हमेशा नहीं रहता, सत्य और नैतिक व्यवस्था फिर से स्थापित हो सकती है। अलग-अलग ग्रंथों और कला में कल्कि का स्वरूप अलग-अलग ढंग से विकसित हुआ है, पर मूल भाव एक ही है कि धर्म बार-बार नए सिरे से स्थापित होता है।
महत्व
कल्कि जयंती का महत्व भक्ति में, पारिवारिक परंपरा में और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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