
एकादशीगुजराती · हिंदू
कामिका एकादशी
Kamika Ekadashi
अगली तारीख़
गुरुवार, 29 जुलाई 2027
- सूर्योदय के समय की तिथि
- कृष्ण दशमी07:34 तक
- नक्षत्र
- रोहिणीअगले दिन 03:27 तक
- मास
- श्रावणअमांत पंचांग में आषाढ
- सूर्योदय
- 06:07सूर्यास्त 19:24
संक्षेप में
कामिका एकादशी हिंदू पंचांग के अनुसार रखा जाने वाला एकादशी व्रत है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।
कथा
कामिका एकादशी किसी एक घटना की कथा से ज़्यादा अपने माहात्म्य के लिए जानी जाती है। परंपरागत कथा में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को नारद जी और बड़े ऋषियों से जुड़ा उपदेश सुनाते हैं। इसमें कहा गया है कि इस एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा, ख़ासकर तुलसी दल और दीये से की गई पूजा, भक्ति का बहुत बड़ा साधन है। कथा बार-बार कहती है कि महँगी सामग्री से बढ़कर मन की सच्चाई है, और श्रद्धा से चढ़ाया गया एक साधारण तुलसी दल भी भगवान विष्णु को प्रिय है। दीया जलाना, जागरण करना, भगवान का स्मरण करना और किसी को नुक़सान पहुँचाने वाले आचरण से बचना, इन सबको मन को शुद्धि की ओर ले जाने का रास्ता बताया गया है। कथा की परंपरा इस व्रत को बड़े पापों के बोझ से छुटकारे और पितरों के प्रति श्रद्धा से भी जोड़ती है। इसलिए भक्त कामिका एकादशी पर अन्न त्यागकर उपवास करते हैं, विष्णु पूजा, तुलसी सेवा, जप, शास्त्र पाठ और दान करते हैं, और द्वादशी को पारण करके व्रत पूरा करते हैं।
Padma Purana के आधार पर
महत्व
विष्णु जी के शयन के बाद की यह पहली एकादशी श्रावण कृष्ण पक्ष (अमांत पंचांग में आषाढ) में आती है। तुलसी दल चढ़ाया जाता है, और माना जाता है कि जो तीर्थ न जा सके, उसे यह व्रत तीर्थ जितना फल देता है।
उपवास
चातुर्मास की यह पहली एकादशी श्रावण कृष्ण पक्ष (अमांत पंचांग में आषाढ) में आती है। तुलसी दल चढ़ाया जाता है, बाक़ी उपवास सामान्य एकादशी जैसा होता है।
Gujarati household practice के आधार पर
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