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लाभ पंचमी

Labh Pancham

अगली तारीख़

शनिवार, 14 नवंबर 2026

59 दिन बाद
उस दिन का पंचांग खोलें

संक्षेप में

दीवाली के बाद के इस शुभ दिन गुजरात में कई व्यापारी समृद्धि की कामना से कामकाज फिर शुरू करते हैं।

कथा

गुजरात में दीवाली की छुट्टियाँ परंपरा से लाभ पंचमी पर पूरी होती हैं, और इस दिन शुभ घड़ी में कामकाज फिर शुरू होता है। ‘लाभ’ का मतलब है फ़ायदा या मुनाफ़ा। यह त्योहार समृद्धि को गणेश जी, लक्ष्मी जी और माँ शारदा के आशीर्वाद से जोड़ता है। पुराने व्यापारी रिवाज में दीवाली के चोपड़ा पूजन में पूजे गए बही-खाते छुट्टी के बाद इसी दिन कारोबार के लिए खोले जाते थे। उनमें अक्सर ‘शुभ’ और ‘लाभ’ लिखकर शुभ और मुनाफ़े वाले साल की प्रार्थना की जाती थी। आज कई जगह हिसाब-किताब डिजिटल हो गया है, फिर भी बहुत सी गुजराती दुकानों, दफ़्तरों और पारिवारिक कारोबारों में लाभ पंचमी पर पहला सौदा करने या दुकान फिर खोलने का रिवाज बना हुआ है। परिवार मंदिर दर्शन को जाते हैं और एक-दूसरे को शुभकामनाएँ और मिठाई देते हैं। दीवाली पर लक्ष्मी पूजन या शारदा पूजन न हो पाया हो, तो कई लोग इस दिन कर लेते हैं। इस तरह लाभ पंचमी आभार, ईमानदारी से कारोबार करने के संकल्प और समृद्धि की आशा के साथ व्यापार फिर शुरू करने का दिन है।

Gujarati household practice के आधार पर

महत्व

लाभ पंचमी का महत्व भक्ति में, पारिवारिक परंपरा में और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।

Gujarati household practice के आधार पर

कैसे मनाते हैं

दीवाली से बंद पड़ी दुकानें सुबह शुभ मुहूर्त में खुलती हैं। नई बही खोलकर पहला हिसाब लिखा जाता है और मिठाई बाँटी जाती है। कई परिवार साल की पहली ख़रीदारी धनतेरस पर नहीं, बल्कि लाभ पंचमी पर करते हैं।

Gujarati household practice के आधार पर

अलग-अलग इलाक़ों में

लाभ पंचमी लगभग पूरी तरह गुजरात का त्योहार है। दूसरी जगहों पर यही तिथि जैनों के लिए ज्ञान पंचमी है, तो कहीं कार्तिक की नाग पंचमी मानी जाती है। वहाँ कारोबार फिर शुरू करने का कोई ख़ास दिन तय नहीं है।

Gujarati household practice के आधार पर

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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