
मेलागुजराती · हिंदू
माधवपुर मेला
Madhavpur Mela · माधवराय मेला
अगली तारीख़
गुरुवार, 15 अप्रैल 2027
संक्षेप में
माधवपुर घेड में पाँच दिन तक श्रीकृष्ण और रुक्मिणी जी का विवाह मनाया जाता है, उसी समुद्र तट पर जहाँ रुक्मिणी जी को लाया गया था।
कथा
रुक्मिणी जी का विवाह शिशुपाल से होने वाला था। उससे पहले उन्होंने श्रीकृष्ण को पत्र लिखकर उन्हें ले जाने की विनती की, और श्रीकृष्ण उन्हें लेने आए। परंपरा के अनुसार यह विवाह पोरबंदर के पास, सौराष्ट्र के समुद्र तट पर बसे माधवपुर में हुआ था। मेले में वही विवाह फिर से रचाया जाता है। राम नवमी से मंडप खड़ा किया जाता है, फेरे होते हैं, और दूल्हे की बारात समुद्र तट तक जाती है। 2018 से यह मेला पूर्वोत्तर राज्यों के साथ मिलकर मनाया जाता है। इसके पीछे एक कथा है, जो रुक्मिणी जी के कुंडनपुर को देश के उसी हिस्से में बताती है।
महत्व
शायद ही कोई हिंदू त्योहार ऐसा हो जिसमें पूरा क़स्बा बाराती बनकर कई दिनों तक विवाह फिर से रचाए। यह मेला ऐसा ही है, और यहाँ भगवान राजा के रूप में नहीं, दूल्हे के रूप में पूजे जाते हैं।
कैसे मनाते हैं
पहले दिन मंडप खड़ा किया जाता है और चौथे दिन फेरे होते हैं। बारात समुद्र तट पर जाकर पूरी होती है।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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