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पूर्णिमागुजराती · हिंदू

माघ पूर्णिमा

Magha Purnima

अगली तारीख़

शनिवार, 20 फ़रवरी 2027

सूर्योदय के समय की तिथि
शुक्ल चतुर्दशी08:00 तक
नक्षत्र
आश्लेषा16:07 तक
मास
माघ
सूर्योदय
07:07सूर्यास्त 18:39
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संक्षेप में

माघ पूर्णिमा हिंदू पंचांग के अनुसार मनाई जाने वाली पूर्णिमा है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।

कथा

माघ पूर्णिमा पर महीने भर चलने वाले माघ स्नान और भक्ति के दिन पूरे होने को आते हैं। हिंदू तीर्थ परंपरा में माघ के दिनों में पवित्र नदियों में स्नान का ख़ास महत्व है, और उसमें भी प्रयागराज के त्रिवेणी संगम का सबसे ज़्यादा। वहाँ बहुत-से श्रद्धालु पूरा महीना प्रार्थना, दान और संयम भरे जीवन में बिताते हैं, जिसे कल्पवास कहते हैं। पूर्णिमा के दिन श्रद्धालु सूर्योदय से पहले या सूर्योदय के समय स्नान करते हैं। भगवान विष्णु और अपने-अपने कुलदेवता की पूजा होती है, दीये जलाए जाते हैं और अन्न व दान अर्पित किया जाता है। कुछ परंपराओं में इस दिन सत्यनारायण की पूजा भी होती है। यह दिन किसी एक पौराणिक कथा पर टिका नहीं है। इसका महत्व उस पुरानी मान्यता से आता है कि सादा जीवन, पवित्र स्नान और खुले हाथ से दान करके मन को शुद्ध करने के लिए माघ के दिन सबसे उत्तम हैं। बड़े तीर्थों में माघ मेले या कुंभ के चक्र में यह एक महत्वपूर्ण स्नान तिथि है, और बहुत-से कल्पवासियों का व्रत इसी दिन पूरा होता है।

Gujarati household practice के आधार पर

महत्व

माघ पूर्णिमा का महत्व भक्ति में, पारिवारिक परंपरा में और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।

कैसे मनाते हैं

सूर्योदय से पहले नदी या तालाब पर स्नान होता है। सर्दी के इन दिनों में किसी को जिस चीज़ की ज़रूरत हो, वही दान की जाती है, जैसे कंबल, तिल या गरम खाना। प्रयाग में महीना भर रहने वाले कल्पवासी इसी दिन कल्पवास पूरा करके घर लौटते हैं। गुजरात में बहुत-से घरों में इस दिन सत्यनारायण की कथा होती है।

Gujarati household practice के आधार पर

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