
त्योहारगुजराती · हिंदू
महाशिवरात्रि
Maha Shivratri
अगली तारीख़
शनिवार, 6 मार्च 2027
- सूर्योदय के समय की तिथि
- कृष्ण त्रयोदशी12:03 तक
- नक्षत्र
- धनिष्ठाअगले दिन 06:41 तक
- मास
- फाल्गुनअमांत पंचांग में माघ
- सूर्योदय
- 06:56सूर्यास्त 18:46
संक्षेप में
महाशिवरात्रि भगवान शिव की पूजा, ध्यान और उपवास की बड़ी रात है, जिसमें रात भर जागरण का ख़ास महत्व है।
कथा
महाशिवरात्रि से कोई एक कथा नहीं, बल्कि शैव परंपरा की कई कथाएँ जुड़ी हैं। एक प्रचलित मान्यता है कि इस रात शिव और पार्वती का पवित्र मिलन हुआ था, जो शिव और शक्ति के संयोग का प्रतीक है। दूसरी कथा समुद्र मंथन की है। अमृत निकलने से पहले समुद्र से हलाहल नाम का भयंकर विष निकला। संसार को बचाने के लिए भगवान शिव ने वह विष पी लिया और उसे कंठ में ही रोक लिया। उनका कंठ नीला पड़ गया, और तभी से वे नीलकंठ कहलाए। शैव ग्रंथों में लिंगोद्भव की कथा भी है। ब्रह्मा जी और विष्णु जी में इस बात पर विवाद चल रहा था कि बड़ा कौन है, तभी अग्नि का एक अनंत स्तंभ प्रकट हुआ। दोनों में से कोई भी उसका आदि या अंत नहीं खोज पाया, और उसी स्तंभ से भगवान शिव अनंत रूप में प्रकट हुए। इन्हीं कथाओं के कारण भक्त पूरी रात प्रार्थना, ध्यान और मंत्र जाप करते हैं, और शिवलिंग का बार-बार अभिषेक करते हैं। उनके लिए जागरण पूजा भी है और भीतर की जागृति की खोज भी।
Shiva Purana के आधार पर
महत्व
महाशिवरात्रि का महत्व भक्ति में, पारिवारिक परंपरा में और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।
कैसे मनाते हैं
दिन भर उपवास रखा जाता है, और रात के चारों प्रहर जागरण होता है। पहले प्रहर में जल से, दूसरे में दूध से, तीसरे में दही और शहद से, और चौथे में फिर जल से अभिषेक होता है। बेलपत्र तीन-तीन पत्तियों वाले चढ़ाए जाते हैं, और इसके सिवा कुछ नहीं चाहिए। मंदिर रात भर खुले रहते हैं। गुजरात में जूनागढ़ का भवनाथ मेला शिवरात्रि तक चलता है।
Gujarati household practice के आधार पर
अलग-अलग इलाक़ों में
जहाँ-जहाँ शिव पूजे जाते हैं, वहाँ महाशिवरात्रि मनाई जाती है, और बारह ज्योतिर्लिंगों पर भारी भीड़ उमड़ती है, जैसे गुजरात में सोमनाथ, काशी विश्वनाथ और उज्जैन। नेपाल में पशुपतिनाथ पर साधु जुटते हैं। कश्मीर में पंडित इसे हेरथ के नाम से कई दिन तक मनाते हैं, और यह उनके साल का सबसे बड़ा त्योहार है। दक्षिण भारत में आधी रात के किसी एक पल पर नहीं, बल्कि पूरी रात अभिषेकम होता है।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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