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जयंतीभारतीय · हिंदू

मत्स्य जयंती

Matsya Jayanti

अगली तारीख़

शुक्रवार, 9 अप्रैल 2027

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संक्षेप में

मत्स्य जयंती हिंदू पंचांग के अनुसार मनाई जाने वाली जयंती है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।

कथा

मत्स्य जयंती भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार की जयंती है। मत्स्य यानी मछली। यह अवतार महाप्रलय में जीवन और पवित्र ज्ञान को बचाने से जुड़ा है। पुराणों में कथा है कि राजा सत्यव्रत से एक छोटी मछली ने शरण माँगी, और राजा ने उसकी रक्षा की। आगे चलकर यही राजा मनु के नाम से जाने गए। मछली देखते-देखते हैरान कर देने वाली तेज़ी से बड़ी होती गई। आख़िर में उसने बताया कि वह स्वयं भगवान विष्णु हैं, और मनु को आने वाले प्रलय की चेतावनी दी। भगवान ने मनु से एक नाव तैयार करने, बीज और जीवन के ज़रूरी रूप सहेजकर रखने, और ऋषियों को नाव में साथ लेने को कहा। प्रलय आया तो मत्स्य भगवान नाव को सुरक्षित जगह तक ले गए। चित्रों में अक्सर वह नाव दिव्य मछली के सींग से बँधी दिखाई जाती है। कुछ कथाओं में मत्स्य भगवान चुराए गए वेद भी वापस लाते हैं। यह कथा मत्स्य अवतार को रक्षा, दूरदर्शिता और पुरानी व्यवस्था डूब जाने पर ज्ञान और जीवन को बचाए रखने के कर्तव्य का प्रतीक बनाती है।

महत्व

मत्स्य जयंती का महत्व भक्ति में, पारिवारिक परंपरा में और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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