
त्योहारगुजराती · हिंदू
नवरात्रि
Navratri
अगली तारीख़
रविवार, 11 अक्टूबर 2026
- सूर्योदय के समय की तिथि
- शुक्ल एकम21:31 तक
- नक्षत्र
- चित्रा22:32 तक
- मास
- आश्विन
- सूर्योदय
- 06:33सूर्यास्त 18:19
संक्षेप में
नवरात्रि देवी माँ की आराधना की नौ रातें हैं, और गुजरात में यह शाम के गरबा और भक्ति के लिए ख़ास जानी जाती है।
कथा
नवरात्रि आदिशक्ति देवी माँ की आराधना की नौ रातें हैं। इसकी मुख्य कथा महिषासुर की है। भैंसे का रूप धरने वाला यह असुर इतना शक्तिशाली हो गया था कि देवता भी उसे हरा नहीं पा रहे थे। तब सभी देवताओं की शक्तियाँ एक हुईं और उनसे माँ दुर्गा प्रकट हुईं। माँ ने महिषासुर से लंबा युद्ध किया और अंत में उसका वध किया। इसीलिए नवरात्रि साहस, दैवी शक्ति और धर्म की पुनर्स्थापना का त्योहार है। ये नौ रातें शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक देवी के नौ रूपों से भी जुड़ी हैं, और हर रूप एक अलग आध्यात्मिक गुण का प्रतीक है। अलग-अलग इलाक़ों में नवरात्रि के रूप भी अलग हैं। बंगाल में दुर्गा पूजा केंद्र में रहती है, उत्तर भारत में ये दिन रामलीला से जुड़ते हैं, और दक्षिण के घरों में गोलु सजाया जाता है। गुजरात शाम के गरबा और डांडिया के लिए मशहूर है, जो देवी के प्रतीक दीये या पवित्र स्थान के चारों ओर खेले जाते हैं। उपवास, आरती, भजन और सामूहिक पूजा के साथ चलने वाला यह त्योहार विजयादशमी पर पूरा होता है।
Devi Mahatmya के आधार पर
महत्व
नवरात्रि का महत्व भक्ति, परिवार की परंपरा और इन दिनों से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।
Gujarati household practice के आधार पर
कैसे मनाते हैं
नवरात्रि में गरबो की स्थापना होती है। गरबो छेदों वाला मिट्टी का घड़ा होता है, जिसके भीतर दीया जलाया जाता है। उसके चारों ओर गोल घेरे में गरबा खेला जाता है, और डंडियों के साथ रास होता है। बहुत से लोग नौ में से कुछ या सभी दिन उपवास रखते हैं और केवल फलाहार लेते हैं।
Gujarati household practice के आधार पर
अलग-अलग इलाक़ों में
गुजरात में गरबा और रास की धूम रहती है, और पूरे-पूरे मोहल्ले देर रात तक गरबा खेलते हैं। बंगाल में आख़िरी चार दिन दुर्गा पूजा और उसके पंडालों में समा जाते हैं। उत्तर भारत में रामलीला होती है और लोग पूरे नौ दिन उपवास रखते हैं। तमिलनाडु और कर्नाटक में गोलु सजाया जाता है, यानी सीढ़ीनुमा पायदानों पर गुड़ियाँ सजाई जाती हैं, और लोग एक-दूसरे के घर उसे देखने जाते हैं। नौ रातें वही, पर मनाने के ढंग चार अलग।
Gujarati household practice के आधार पर
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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