
एकादशीगुजराती · हिंदू
निर्जला एकादशी
Nirjala Ekadashi · Bhimseni Ekadashi · Pandava Ekadashi
अगली तारीख़
सोमवार, 14 जून 2027
- सूर्योदय के समय की तिथि
- शुक्ल एकादशीअगले दिन 02:08 तक
- नक्षत्र
- चित्रा17:27 तक
- मास
- ज्येष्ठ
- सूर्योदय
- 05:52सूर्यास्त 19:27
संक्षेप में
निर्जला एकादशी हिंदू पंचांग का एक एकादशी व्रत है, जिसकी तिथि और रीति-रिवाज़ क्षेत्र तथा स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।
कथा
निर्जला एकादशी को भीमसेनी या पांडव एकादशी भी कहते हैं, क्योंकि इसकी कथा भीम से जुड़ी है। कथा है कि युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल, सहदेव, कुंती और द्रौपदी नियम से एकादशी का व्रत रखते थे। भीम को भूख बहुत लगती थी, इसलिए उनसे उपवास नहीं हो पाता था। साल की चौबीस एकादशियाँ निभा लेने का दिखावा करने के बजाय वे राह पूछने महर्षि व्यास के पास गए। व्यास जी ने उन्हें ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी का व्रत पूरी कठोरता से, परंपरा के अनुसार बिना अन्न और जल के, रखने को कहा। उन्होंने समझाया कि सच्चे मन से रखा गया यह एक व्रत साल भर की सभी एकादशियों का पुण्य देता है। भीम ने यह कठिन व्रत स्वीकार किया, और इसी से यह एकादशी भीमसेनी और पांडव एकादशी के नाम से जानी गई। यह कथा अपनी सीमा को ईमानदारी से मानने और दृढ़ भक्ति की सीख देती है। व्रत बहुत कठिन है, इसलिए कई भक्त अपनी सेहत और क्षमता के अनुसार इसमें छूट लेते हैं, पर प्रार्थना, विष्णु पूजा और द्वादशी का पारण नहीं छोड़ते।
Mahabharata (Vyasa) के आधार पर
महत्व
चौबीस एकादशियों में यह सबसे कठिन है। सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक पानी भी नहीं पिया जाता। भीम बाक़ी तेईस एकादशियाँ नहीं रख पाते थे, तो उनसे कहा गया कि यह एक एकादशी सबके बराबर होगी। इसीलिए इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। यह व्रत ज्येष्ठ में आता है, जो साल का सबसे गर्म महीना है, और इस व्रत का मर्म भी यही है।
उपवास
निर्जला का अर्थ है बिना जल के। सूर्योदय से अगली सुबह के पारण तक मुँह में कुछ भी नहीं डाला जाता, और ज्येष्ठ में वह दिन साल के सबसे गर्म दिनों में से एक होता है। जो लोग कोई और एकादशी नहीं रखते, वे भी यह एकादशी रखते हैं। सबसे ज़्यादा अधूरी भी यही रखी जाती है। कोई पानी पी लेता है, तो कोई शाम को व्रत खोल लेता है, और इसे कोई पूरा व्रत नहीं मानता। इस दिन जितना जल-दान होता है, उतना किसी और दिन नहीं होता।
Gujarati household practice के आधार पर
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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