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पद्मिनी एकादशी

Padmini Ekadashi · Kamala Ekadashi · Purushottami Ekadashi

अगली तारीख़

सोमवार, 26 मार्च 2029

सूर्योदय के समय की तिथि
शुक्ल एकादशी21:36 तक
नक्षत्र
पुष्य09:10 तक
मास
अधिक चैत्र
सूर्योदय
06:36सूर्यास्त 18:54
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संक्षेप में

पद्मिनी एकादशी हिंदू पंचांग के अनुसार रखा जाने वाला एकादशी का व्रत है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।

कथा

पद्मिनी एकादशी केवल अधिक मास में आती है। इस दुर्लभ एकादशी का इतना महत्व क्यों है, यह इसकी कथा बताती है। कथा है कि राजा कृतवीर्य और रानी पद्मिनी को ऐसी संतान की चाह थी, जो राजवंश को आगे बढ़ाए। बहुत तप किया, पर फल नहीं मिला। तब रानी पद्मिनी पूज्य अनसूया जी के पास मार्गदर्शन लेने गईं। अनसूया जी ने उन्हें अधिक मास की एकादशी का व्रत बताया, जिसमें उपवास, भगवान विष्णु की पूजा और रात्रि जागरण होता है। रानी की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने वर माँगने को कहा, और राजा-रानी ने असाधारण पुत्र माँगा। उनके पुत्र थे कार्तवीर्य अर्जुन। कथाओं में उन्हें ऐसे पराक्रमी राजा के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने रावण के आगे चलकर इतना बलशाली बनने से पहले उसे भी हरा दिया था। यह कथा बताती है कि राजवैभव से बड़ी पद्मिनी का धैर्य और संयम भरी भक्ति है, और अधिक मास का यह व्रत एकाग्र मन से भक्ति करने का अवसर है।

Padma Purana के आधार पर

महत्व

यह एकादशी केवल अधिक मास, यानी पंचांग के अतिरिक्त महीने में आती है। इसलिए यह लगभग 3 साल में एक बार आती है, और बीच के सालों में आती ही नहीं। अधिक मास की दो एकादशियों में से यह शुक्ल पक्ष की है।

उपवास

यह व्रत अधिक मास के शुक्ल पक्ष में आता है, इसलिए लगभग 3 साल में एक बार पड़ता है और इसका कोई तय महीना नहीं है। साल की 24 एकादशियाँ रखने वाले, यह एकादशी आने पर इसे 25वीं एकादशी के रूप में रखते हैं।

Gujarati household practice के आधार पर

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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