
एकादशीगुजराती · हिंदू
पापांकुशा एकादशी
Papankusha Ekadashi
अगली तारीख़
गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026
- सूर्योदय के समय की तिथि
- शुक्ल एकादशी14:48 तक
- नक्षत्र
- शतभिषा20:48 तक
- मास
- आश्विन
- सूर्योदय
- 06:38सूर्यास्त 18:09
संक्षेप में
पापांकुशा एकादशी हिंदू पंचांग का एक एकादशी व्रत है, जिसकी तिथि और रीति-रिवाज़ क्षेत्र तथा स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।
कथा
एकादशी माहात्म्य में पापांकुशा एकादशी को ऐसा दिन बताया गया है, जब मनुष्य जान-बूझकर बुरी आदतों से मुँह मोड़कर भगवान विष्णु की ओर मुड़े। नवरात्रि के बाद आने वाली इस एकादशी का महत्व श्रीकृष्ण अर्जुन को बताते हैं। वे पद्मनाभ विष्णु की पूजा, उपवास, दान और भगवान के नाम-स्मरण की महिमा गाते हैं। यहाँ कोई एक बड़ी नाटकीय कथा नहीं है, मुख्य रूप से सदाचार के फल का उपदेश है। इसमें ज़ोर दिया गया है कि साधना के साथ करुणा भी होनी चाहिए। अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, जल, भूमि या कोई और उपयोगी वस्तु दान करने की बार-बार प्रशंसा की गई है। नाम दो शब्दों से बना है, पाप यानी बुरा कर्म, और अंकुश यानी वह नुकीला दंड जिससे वश में रखा जाता है। यह नाम मन को ग़लत राह पर ले जाने वाली प्रवृत्तियों पर क़ाबू का भाव देता है। भक्त इस दिन अन्न नहीं खाते। वे विष्णु पूजा, जप, धर्मग्रंथों का पाठ और दान करते हैं, और द्वादशी को तय समय पर पारण करते हैं।
Padma Purana के आधार पर
महत्व
अंकुश वह नुकीला दंड है जिससे हाथी को चलाया जाता है, और नाम के अनुसार यह व्रत पाप पर अंकुश का काम करता है। यह आश्विन शुक्ल पक्ष में, नवरात्रि के बाद के दिनों में आता है।
उपवास
यह व्रत आश्विन शुक्ल पक्ष में, नवरात्रि के बाद के दिनों में आता है। पापांकुशा यानी वह अंकुश जो पाप को रोककर रखे।
Gujarati household practice के आधार पर
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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