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एकादशीगुजराती · हिंदू

परमा एकादशी

Parama Ekadashi

अगली तारीख़

सोमवार, 9 अप्रैल 2029

सूर्योदय के समय की तिथि
कृष्ण एकादशी17:39 तक
नक्षत्र
धनिष्ठा15:40 तक
मास
अधिक चैत्र
सूर्योदय
06:23सूर्यास्त 18:59
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संक्षेप में

परमा एकादशी हिंदू पंचांग के अनुसार रखा जाने वाला एकादशी व्रत है, और इसकी तारीख़ व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।

कथा

परमा एकादशी अधिक मास के कृष्ण पक्ष में आती है। इसकी कथा गरीब पर भक्त ब्राह्मण सुमेधा और उनकी पत्नी पवित्रा की है। घर में घोर गरीबी थी, फिर भी पवित्रा द्वार पर आए अतिथि का आदर करतीं और घर में जो थोड़ा-बहुत खाना होता, उसे उनके साथ बाँटतीं। सुमेधा ने सोचा कि घर छोड़कर कहीं और कमाने चले जाएँ। पर पवित्रा ने उन्हें समझाया कि निराश होकर धर्म का जीवन न छोड़ें। एक दिन कौंडिन्य ऋषि उनके घर पधारे। पति-पत्नी ने आदर से उनकी सेवा की और मार्ग दिखाने की विनती की। ऋषि ने उन्हें परमा एकादशी का व्रत और अधिक मास के नियम निभाने की सलाह दी। दोनों ने श्रद्धा से व्रत किया। कथा कहती है कि उनकी हालत सुधरी, घर आर्थिक रूप से संभल गया और पुण्य भी मिला। यह कथा सिखाती है कि गरीबी में भी उदारता और भक्ति छोड़ने की ज़रूरत नहीं, और कठिन समय में निभाया गया संयम ही सबसे सार्थक होता है।

Padma Purana के आधार पर

महत्व

परमा एकादशी अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। पद्मिनी एकादशी की तरह यह सामान्य वर्ष में आती ही नहीं। दोनों एकादशियाँ कम ही आती हैं, इसलिए साल की चौबीस एकादशियों से इनका फल ज़्यादा माना जाता है।

उपवास

यह व्रत अधिक मास के कृष्ण पक्ष में आता है। पंचांग का यह सबसे दुर्लभ व्रत है, और ज़्यादातर लोगों को जीवन में दो या तीन बार ही इसे रखने का अवसर मिलता है।

Gujarati household practice के आधार पर

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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