
जयंतीभारतीय · हिंदू
परशुराम जयंती
Parashurama Jayanti
अगली तारीख़
शनिवार, 8 मई 2027
- सूर्योदय के समय की तिथि
- शुक्ल द्वितीया11:43 तक
- नक्षत्र
- रोहिणी21:52 तक
- मास
- वैशाख
- सूर्योदय
- 06:01सूर्यास्त 19:11
संक्षेप में
परशुराम जयंती हिंदू पंचांग के अनुसार मनाई जाने वाली जयंती है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।
कथा
परशुराम जयंती पर फरसा धारण करने वाले योद्धा ऋषि भगवान परशुराम को याद किया जाता है। कई परंपराएँ उन्हें भगवान विष्णु का छठा अवतार मानती हैं। ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र परशुराम में ब्राह्मण का ज्ञान और क्षत्रिय का शौर्य, दोनों एक साथ मिलते हैं। पुराणों और महाकाव्यों में एक हिंसक युग की कथा है, जब घमंडी राजा सत्ता का दुरुपयोग कर रहे थे। राजा कार्तवीर्य अर्जुन के पुत्रों ने जमदग्नि ऋषि का वध किया, जिसके बाद परशुराम ने अत्याचारी क्षत्रियों के विरुद्ध भीषण युद्ध किए। इसीलिए उनके व्यक्तित्व में न्याय, क्रोध और तप, तीनों गुँथे हुए हैं। बाद की परंपराओं में वे महान योद्धाओं के गुरु के रूप में भी आते हैं, और भारत के पश्चिमी तट के कुछ इलाक़ों की रचना या बसावट से भी उनका नाम जुड़ा है। उनकी जयंती सिर्फ़ शौर्य को याद करने का दिन नहीं है। सत्ता के साथ आने वाली ज़िम्मेदारी, बेक़ाबू क्रोध के ख़तरे और संघर्ष के बाद फिर से तप और आध्यात्मिक अनुशासन की ओर लौटने पर विचार करने का भी यह दिन है।
महत्व
परशुराम जयंती का महत्व भक्ति में, पारिवारिक परंपरा में और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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