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परिवर्तिनी एकादशी

Parivartini Ekadashi · Vamana Ekadashi · Parsva Ekadashi

अगली तारीख़

मंगलवार, 22 सितंबर 2026

6 दिन बाद
सूर्योदय के समय की तिथि
शुक्ल एकादशी21:43 तक
नक्षत्र
उत्तराषाढा07:06 तक
मास
भाद्रपद
सूर्योदय
06:27सूर्यास्त 18:37
उस दिन का पंचांग खोलें

संक्षेप में

परिवर्तिनी एकादशी हिंदू पंचांग के अनुसार रखा जाने वाला एकादशी व्रत है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।

कथा

परिवर्तिनी एकादशी चातुर्मास में आती है। मान्यता है कि योगनिद्रा में सोए भगवान विष्णु इस दिन करवट बदलते हैं, और इसी से इसका नाम परिवर्तिनी पड़ा। इसे वामन एकादशी और पार्श्व एकादशी भी कहते हैं, और इस दिन से भगवान के वामन अवतार और राजा बलि की कथा जुड़ी है। कथा है कि छोटे कद के ब्राह्मण वामन ने राजा बलि से केवल तीन पग भूमि माँगी। फिर उन्होंने विराट रूप धारण किया और दो पग में धरती और स्वर्ग नाप लिए। तीसरे पग के लिए बलि ने विनम्रता से अपना सिर आगे कर दिया। राजा के इस समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसे सम्मान और संरक्षण दिया। इसलिए इस एकादशी में चातुर्मास की भक्ति के साथ विनम्रता, दिया हुआ वचन निभाने और अहंकार छोड़ने की सीख भी है। भक्त भगवान विष्णु या वामन भगवान की पूजा करते हैं, अन्न त्यागकर उपवास करते हैं, तुलसी चढ़ाते हैं, दान करते हैं, और द्वादशी को पारण करके व्रत पूरा करते हैं।

Bhagavata Purana के आधार पर

महत्व

मान्यता है कि शयन कर रहे भगवान विष्णु इस दिन करवट बदलते हैं, इसीलिए नाम परिवर्तिनी है। यह चातुर्मास के आधे होने का संकेत है। इसे पार्श्व एकादशी भी कहते हैं। अगले दिन, भाद्रपद शुक्ल द्वादशी को, वामन जयंती होती है।

उपवास

चातुर्मास के बीचोंबीच आने वाला यह उपवास सामान्य एकादशी जैसा है। इस दिन दही-चावल दान किए जाते हैं।

Gujarati household practice के आधार पर

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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