
त्योहारगुजराती · हिंदू
राम नवमी
Ram Navami
अगली तारीख़
गुरुवार, 15 अप्रैल 2027
- सूर्योदय के समय की तिथि
- शुक्ल नवमी13:21 तक
- नक्षत्र
- पुष्य09:33 तक
- मास
- चैत्र
- सूर्योदय
- 06:18सूर्यास्त 19:01
संक्षेप में
चैत्र शुक्ल नवमी को राम नवमी पर धर्म और सदाचार के आदर्श माने जाने वाले भगवान राम का जन्मोत्सव मनाया जाता है।
कथा
राम नवमी श्रीराम के जन्म का त्योहार है। वैष्णव परंपरा में श्रीराम भगवान विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं, और वे अयोध्या के राजकुमार थे। रामायण की कथा है कि राजा दशरथ को वंश चलाने के लिए संतान की बड़ी इच्छा थी। ऋषियों के मार्गदर्शन में उन्होंने यज्ञ किया। यज्ञ से मिला दिव्य प्रसाद रानियों में बाँटा गया। रानी कौशल्या की कोख से श्रीराम का जन्म हुआ, और दूसरी रानियों से भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न जन्मे। आगे चलकर वनवास में भी श्रीराम ने धर्म का साथ नहीं छोड़ा। हनुमान जी और वानर सेना के साथ मिलकर उन्होंने रावण पर विजय पाई और अयोध्या लौटे। इसीलिए श्रीराम सदाचार और प्रजा के प्रति ज़िम्मेदार राजा के आदर्श माने जाते हैं। राम नवमी पर भक्त विशेष रूप से श्रीराम के जन्म की घड़ी को याद करते हैं। रामायण और रामचरितमानस का पाठ होता है या कथा सुनी जाती है, राम नाम का कीर्तन होता है और पूजा की जाती है। कई जगह बाल रूप श्रीराम को पालने में विराजमान किया जाता है। राम नवमी मनाने के सबसे अहम स्थानों में अयोध्या एक है।
Ramayana (Valmiki) के आधार पर
महत्व
राम नवमी का महत्व भक्ति में, परिवार की परंपरा में और इस दिन के आध्यात्मिक या ऋतु से जुड़े अर्थ में है।
Ramayana (Valmiki) के आधार पर
कैसे मनाते हैं
राम नवमी से पहले के दिनों में रामायण का पाठ इस तरह चलाया जाता है कि श्रीराम के जन्म का प्रसंग नवमी को ठीक दोपहर में आए। पालना रखकर झुलाया जाता है। गुड़ के पानी में काली मिर्च और इलायची डालकर पानकम बनाया जाता है और सबको बाँटा जाता है। बहुत से लोग सुबह से उपवास रखते हैं और इसी पानकम से उपवास खोलते हैं।
Gujarati household practice के आधार पर
अलग-अलग इलाक़ों में
सबसे बड़ा आयोजन अयोध्या में होता है, जहाँ मेला लगता है। बिहार और उत्तर भारत में रामनवमी की शोभायात्राएँ निकलती हैं। महाराष्ट्र के मंदिरों में दोपहर को पालना झुलाया जाता है। तमिलनाडु में गुड़ और काली मिर्च का पानकम बनता है, जो गर्मी में राहत देता है। इसी दिन चैत्र नवरात्रि पूरी होती है, इसलिए इससे पहले के नौ दिन भी मनाए जाते हैं।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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