
एकादशीगुजराती · हिंदू
सफला एकादशी
Saphala Ekadashi
अगली तारीख़
रविवार, 3 जनवरी 2027
- सूर्योदय के समय की तिथि
- कृष्ण एकादशी16:08 तक
- नक्षत्र
- विशाखा21:36 तक
- मास
- पौषअमांत पंचांग में मार्गशीर्ष
- सूर्योदय
- 07:20सूर्यास्त 18:08
संक्षेप में
सफला एकादशी हिंदू पंचांग का एक एकादशी व्रत है, जिसकी तिथि और रीति-रिवाज़ क्षेत्र तथा स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।
कथा
सफला एकादशी की कथा राजा महिष्मान के बेटे लुंपक की है, जो ग़लत राह पर चल पड़ा था। चोरी, हिंसा और उद्दंड व्यवहार के कारण उसे राज्य से निकाल दिया गया। वह जंगल में रहने लगा और शिकार व चोरी से पेट भरता था। सर्दियों की एक एकादशी को वह इतना कमज़ोर हो गया कि शिकार भी न कर सका। उसने नीचे गिरे फल इकट्ठे किए, पर खा न सका। तब उसने वे फल एक पवित्र पेड़ के नीचे रख दिए और मन ही मन अपने आप हरि को पुकारा। ठंड और दुख के कारण वह रात भर सो न सका। इस तरह बिना सोचे-समझे उससे उपवास, अर्पण और जागरण, तीनों हो गए। कथा कहती है कि अनजाने में हुआ यही व्रत उसके जीवन का मोड़ बना। उसके पुराने पापों का बोझ हल्का हुआ, एक दिव्य घोड़ा प्रकट हुआ, और वह बदले हुए स्वभाव के साथ पिता के पास लौटा। समय के साथ उसने ज़िम्मेदारी से राज किया। ‘सफला’ का अर्थ है फल देने वाली या सफल बनाने वाली। यह नाम बताता है कि बहुत भटका हुआ जीवन भी बदल सकता है, अगर पछतावा, संयम और भक्ति सच्चे हों।
Padma Purana के आधार पर
महत्व
सफला यानी फल देने वाली। किया हुआ काम फले, इसके लिए यह व्रत रखा जाता है। यह कृष्ण पक्ष में, कड़ाके की सर्दी में आती है।
उपवास
यह पौष कृष्ण एकादशी (अमांत पंचांग में मार्गशीर्ष) है, गुजराती साल के सबसे ठंडे दिनों में। शुरू होकर अटका हुआ काम पूरा हो, इसके लिए रखी जाती है।
Gujarati household practice के आधार पर
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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