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श्रावण पुत्रदा एकादशी

Shravana Putrada Ekadashi · Pavitra Ekadashi

अगली तारीख़

गुरुवार, 12 अगस्त 2027

सूर्योदय के समय की तिथि
शुक्ल एकादशीअगले दिन 03:00 तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा11:33 तक
मास
श्रावण
सूर्योदय
06:13सूर्यास्त 19:15
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संक्षेप में

श्रावण पुत्रदा एकादशी हिंदू पंचांग के अनुसार रखा जाने वाला एकादशी व्रत है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।

कथा

श्रावण पुत्रदा एकादशी की कथा माहिष्मती नगरी के राजा महाजित की है। राजा प्रजा के प्रिय थे, राज्य समृद्ध था और राज-काज भी अच्छे से चलता था। फिर भी उनके कोई संतान नहीं थी। प्रजा ने राजा के दुख को अपना दुख माना, और कोई धार्मिक उपाय खोजते हुए लोग लोमश ऋषि के पास पहुँचे। ऋषि ने राजा के पूर्वजन्म की एक कथा सुनाकर इस दुख का कारण समझाया। फिर सबको श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने और उसका पुण्य राजा को अर्पित करने की सलाह दी। मंत्रियों और नगरवासियों ने उपवास रखकर भगवान विष्णु की पूजा की, और जुटा हुआ पुण्य राजा के कल्याण के लिए अर्पित कर दिया। कथा है कि कुछ समय बाद रानी गर्भवती हुईं और पुत्र का जन्म हुआ। पौष की पुत्रदा एकादशी की कथा से यह कथा अलग है, क्योंकि इसमें पूरा समाज किसी दूसरे के लिए मिलकर व्रत करता है। इसलिए यह दिन आशा और सामूहिक प्रार्थना का है। साथ ही यह सिखाता है कि नियम से की गई भक्ति का पुण्य बिना स्वार्थ के किसी और को भी दिया जा सकता है।

Padma Purana के आधार पर

महत्व

बरसात में, श्रावण में आने वाली यह पुत्रदा एकादशी सर्दियों की पौष पुत्रदा एकादशी वाले कारण से ही रखी जाती है। उत्तर भारत के बड़े हिस्से में यह रक्षाबंधन वाले हफ़्ते में पड़ती है, और दोनों साथ मनाए जाते हैं।

उपवास

श्रावण शुक्ल एकादशी का यह व्रत संतान की इच्छा रखने वाले करते हैं। अक्सर अकेली माँ नहीं, बल्कि माता-पिता दोनों उपवास रखते हैं।

Gujarati household practice के आधार पर

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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