
संक्षेप में
दो तारों की याद में मनोकामनाएँ काग़ज़ पर लिखकर बाँस पर बाँधी जाती हैं।
कथा
ओरिहिमे और हिकोबोशी, यानी वेगा और अल्टेयर तारे, आकाशगंगा के दो किनारों पर एक-दूसरे से बिछड़ गए हैं। साल में सिर्फ़ एक रात उन्हें मिलने दिया जाता है। यह कथा चीन से आई है, पर बाँस पर मनोकामनाएँ बाँधने की रीत जापान की अपनी है। ज़्यादातर जगहों पर तनाबाता 7 जुलाई को मनाया जाता है, और जहाँ पुराना कैलेंडर चलता है वहाँ एक महीने बाद।
Gujarati household practice के आधार पर
महत्व
ओरिहिमे बुनकर है और हिकोबोशी ग्वाला, और वे वेगा और अल्टेयर तारे हैं। साल में एक रात उन्हें आकाशगंगा पार करके मिलने दिया जाता है। तानज़ाकु पट्टियों पर मनोकामनाएँ लिखकर बाँस पर बाँधी जाती हैं, और बाद में बाँस बहा या जला दिया जाता है।
कैसे मनाते हैं
रंगीन काग़ज़ की पट्टियों, यानी तानज़ाकु पर मनोकामनाएँ लिखकर बाँस की डाल पर बाँधी जाती हैं, जो बाद में बहा या जला दी जाती है। सड़कों पर काग़ज़ की झालरें टाँगी जाती हैं, और अगस्त का सेंदाई त्योहार सबसे बड़ा होता है। कहते हैं, उस रात बारिश हो तो दोनों को एक साल और इंतज़ार करना पड़ता है।
Gujarati household practice के आधार पर
अलग-अलग इलाक़ों में
जापान के ज़्यादातर हिस्सों में तनाबाता 7 जुलाई को मनाया जाता है, और जहाँ पुरानी चंद्र गणना बची है वहाँ एक महीने बाद। सेंदाई का सबसे बड़ा त्योहार अगस्त में होता है। यही कथा चीन में चीशी, कोरिया में चिलसोक और वियतनाम में थात तिच है, और तीनों जगह सातवें चंद्र मास की सातवीं रात को मनाई जाती है।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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