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Teej · हरियाली तीज · सिंधारा तीज

अगली तारीख़

बुधवार, 4 अगस्त 2027

सूर्योदय के समय की तिथि
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मघा11:36 तक
मास
श्रावण
सूर्योदय
06:10सूर्यास्त 19:21
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संक्षेप में

उत्तर भारत में बरसात की तीज पेड़ों पर डले झूलों पर झूलकर मनाई जाती है।

कथा

उत्तर भारत की बरसात वाली तीज माता पार्वती की याद में रखी जाती है। उन्होंने भगवान शिव के लिए सौ वर्ष तक प्रतीक्षा की, और फिर दोनों का विवाह हुआ। तीज तीन हैं, हरियाली, कजरी और हरतालिका। तीनों में हरा रंग, बारिश और झूले एक जैसे हैं। महिलाओं का त्योहार घर से बाहर मनाया जाए, यह अनोखी बात है, और यहाँ झूला केवल सजावट नहीं है।

Gujarati household practice के आधार पर

महत्व

यह बरसात में आने वाला महिलाओं का त्योहार है। पेड़ों पर झूले डलते हैं, हाथों में मेहंदी लगती है, हरे कपड़े पहने जाते हैं, और पति की लंबी उम्र के लिए या मनचाहा वर पाने के लिए व्रत रखा जाता है। माता पार्वती ने भगवान शिव को रूप से नहीं, तप से पाया था, और यह व्रत उसी की याद में रखा जाता है।

कैसे मनाते हैं

पेड़ों पर झूले डाले जाते हैं और उन पर झूलते हुए गीत गाए जाते हैं। हरे कपड़े पहने जाते हैं, मेहंदी लगाई जाती है, और ब्याही बेटियों को मायके से सिंधारा भेजा जाता है, जिसमें कपड़े, चूड़ियाँ और मिठाई होती है। इस दिन की मिठाई घेवर है। राजस्थान में इस दिन जयपुर में गौरी माता की प्रतिमा की शोभायात्रा निकलती है।

Gujarati household practice के आधार पर

अलग-अलग इलाक़ों में

तीन अलग-अलग तीज मनाई जाती हैं, और तीनों एक ही त्योहार नहीं हैं। श्रावण में हरियाली तीज आती है, उसके पखवाड़े भर बाद कजरी तीज, और भाद्रपद में हरतालिका तीज। हरतालिका सबसे कठिन है, और यह निर्जला रखी जाती है। राजस्थान और ब्रज में पहली तीज मनाई जाती है, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में दूसरी, और नेपाल, बिहार और दक्षिण-पूर्व में तीसरी।

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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