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जयंतीभारतीय · हिंदू

तुलसीदास जयंती

Tulsidas Jayanti

अगली तारीख़

रविवार, 8 अगस्त 2027

सूर्योदय के समय की तिथि
शुक्ल सप्तमी22:24 तक
नक्षत्र
स्वातिअगले दिन 06:21 तक
मास
श्रावण
सूर्योदय
06:12सूर्यास्त 19:18
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संक्षेप में

तुलसीदास जयंती हिंदू पंचांग के अनुसार मनाई जाने वाली जयंती है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।

कथा

तुलसीदास जयंती पर गोस्वामी तुलसीदास जी को याद किया जाता है। इन संत कवि के रचे रामचरितमानस ने श्रीराम की कथा और भक्ति को उत्तर भारत के लाखों घरों तक ऐसे रूप में पहुँचाया जिसे हर कोई समझ सके। उन्होंने रामकथा को केवल शास्त्रीय संस्कृत तक सीमित नहीं रखा, और मुख्य रूप से अवधी में उसे फिर से कहा। इसमें भक्ति, सदाचार, विनम्रता और इस आस्था पर ख़ास ज़ोर है कि भगवान का नाम ही भवसागर से पार लगाता है। परंपरा उनके जीवन को वाराणसी, अयोध्या, चित्रकूट और हनुमान भक्ति से गहराई से जोड़ती है। कई कथाओं में बताया जाता है कि हनुमान जी के मार्गदर्शन से उन्हें प्रभु श्रीराम के दर्शन हुए। विनयपत्रिका और परंपरा से उनकी रचना मानी जाने वाली हनुमान चालीसा जैसी उनकी दूसरी रचनाएँ लोकभक्ति का अहम हिस्सा बन गईं। उनकी जयंती पर भक्त रामचरितमानस का पाठ करते हैं, श्रीराम और हनुमान जी की स्तुति गाते हैं, सत्संग करते हैं, और तत्वज्ञान व भक्ति को रोज़ की बोलचाल में उतारने वाले इस साहित्य का सम्मान करते हैं।

Gujarati household practice के आधार पर

महत्व

तुलसीदास जयंती का महत्व भक्ति, परिवार की परंपरा और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।

कैसे मनाते हैं

रामचरितमानस का पाठ होता है, कहीं नौ दिन के पारायण के रूप में तो कहीं पूरे दिन के अखंड पाठ के रूप में। उनकी रचना हनुमान चालीसा तो हर जगह पढ़ी जाती है, वहाँ भी जहाँ यह जयंती नहीं मनाई जाती। सबसे बड़े आयोजन अयोध्या, वाराणसी और चित्रकूट में होते हैं।

Gujarati household practice के आधार पर

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