
दिवसभारत · राज्य दिवस
उत्कल दिवस
Utkal Divas · Odisha Day
अगली तारीख़
गुरुवार, 1 अप्रैल 2027
संक्षेप में
बिहार और उड़ीसा प्रांत, मद्रास प्रेसिडेंसी और सेंट्रल प्रोविंसेज़ में बँटे ओड़िया बोलने वाले लोगों को 1 अप्रैल 1936 को ओडिशा नाम से अलग प्रांत मिला, इसी की याद में उत्कल दिवस, यानी ओडिशा दिवस, मनाया जाता है।
कथा
उत्कल दिवस को ओडिशा दिवस भी कहते हैं। 1 अप्रैल 1936 को ओडिशा अलग प्रांत बना, उसी की याद में यह दिन मनाया जाता है। इससे पहले ओड़िया बोलने वाले लोग बिहार और उड़ीसा प्रांत, मद्रास प्रेसिडेंसी और सेंट्रल प्रोविंसेज़ में बँटे हुए थे। उन्नीसवीं सदी के आख़िर और बीसवीं सदी की शुरुआत से कई नेताओं, लेखकों और उत्कल सम्मिलनी जैसी संस्थाओं ने इसके लिए काम किया। उनकी माँग थी कि ओड़िया बोलने वाले सभी इलाक़े एक प्रशासन के तहत आएँ और ओड़िया भाषा व संस्कृति की पहचान बची रहे। इसलिए 1936 में अलग प्रांत का बनना भारत में भाषा के आधार पर प्रदेश गठित करने के इतिहास में एक अहम पड़ाव माना जाता है। उत्कल दिवस पर इस उपलब्धि के साथ ओडिशा की विरासत का भी उत्सव मनाया जाता है, जिसमें साहित्य, शास्त्रीय और लोक कलाएँ, मंदिर स्थापत्य, समुद्री इतिहास और समाज की परंपराएँ शामिल हैं। इस दिन सार्वजनिक इमारतें और सड़कें सजाई जाती हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं, और एकजुट ओड़िया प्रदेश के आंदोलन से जुड़े लोगों को श्रद्धांजलि दी जाती है।
महत्व
उत्कल दिवस भारत के किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति, संस्था, घटना या सार्वजनिक मूल्य को याद करने का दिन है।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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