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वैसाखी · बैसाखी

Vaisakhi / Baisakhi

अगली तारीख़

बुधवार, 14 अप्रैल 2027

सूर्योदय के समय की तिथि
शुक्ल अष्टमी15:24 तक
नक्षत्र
पुनर्वसु10:52 तक
मास
चैत्र
सूर्योदय
06:19सूर्यास्त 19:01
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संक्षेप में

वैसाखी या बैसाखी हिंदू पंचांग के अनुसार मनाया जाने वाला त्योहार है, और इसकी तारीख़ और रीति-रिवाज़ क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।

कथा

वैसाखी या बैसाखी उत्तर भारत के कई हिस्सों में वसंत में आने वाला फ़सल का त्योहार है, और सिख इतिहास में इसकी जगह बहुत बड़ी है। रबी की फ़सल पककर तैयार होती है तो किसान आभार मानते हैं, मेले लगते हैं, गीत-संगीत होता है और सब साथ बैठकर खाते हैं। सिखों के लिए वैसाखी 1699 के उस जमावड़े की याद भी है, जिसने सिख समाज की दिशा बदल दी। आनंदपुर साहिब में गुरु गोबिंद सिंह जी ने ख़ालसा की स्थापना की और पंज प्यारों को दीक्षा दी। इससे साहस, बराबरी और सेवा को समर्पित एक अनुशासित पंथ खड़ा हुआ। गुरुद्वारों में कीर्तन, पाठ, नगर कीर्तन और लंगर होते हैं, और पंजाब में लोग भांगड़ा और गिद्दा करते हैं। सूर्य का यही संक्रमण भारत के कई दूसरे इलाक़ों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। इस तरह वैसाखी में मौसम की ख़ुशी भी है और इतिहास की गहरी याद भी। फ़सल के लिए आभार के साथ समाज के प्रति ज़िम्मेदारी, स्वाभिमान और बिना डरे सही करने का संकल्प भी इसमें घुला है।

Gujarati household practice के आधार पर

महत्व

वैसाखी या बैसाखी भक्ति और पारिवारिक परंपरा का त्योहार है, जिसके साथ आध्यात्मिक और मौसमी अर्थ भी जुड़ा है।

कैसे मनाते हैं

खेतों में और मेलों में भांगड़ा और गिद्दा होता है, और गेहूँ की कटाई होती है। गुरुद्वारों से नगर कीर्तन निकलता है, और निशान साहिब का चोला बदला जाता है। किसान पहले ग्रंथ साहिब के आगे साल भर का शुक्राना करते हैं, और फिर खलिहान में।

Gujarati household practice के आधार पर

अलग-अलग इलाक़ों में

पंजाब और हरियाणा में, और विदेश की हर सिख संगत में यह त्योहार मनाया जाता है, और वहाँ साल का सबसे बड़ा नगर कीर्तन इसी दिन निकलता है। सूर्य के इसी प्रवेश के दिन बंगाल में पोहेला बोइशाख, असम में बोहाग बिहू, तमिलनाडु में पुथांडु, केरल में विषु और ओडिशा में महा विषुव संक्रांति मनाई जाती है।

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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