
व्रतभारतीय · हिंदू
अहोई अष्टमी
Ahoi Ashtami
अगली तारीख़
रविवार, 1 नवंबर 2026
- सूर्योदय के समय की तिथि
- कृष्ण सप्तमी14:52 तक
- नक्षत्र
- पुष्यअगले दिन 04:30 तक
- मास
- कार्तिकअमांत पंचांग में आश्विन
- सूर्योदय
- 06:43सूर्यास्त 18:02
संक्षेप में
अहोई अष्टमी हिंदू पंचांग के अनुसार रखा जाने वाला व्रत है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।
कथा
अहोई अष्टमी का व्रत परंपरा से माताएँ अपनी संतान की कुशलता और लंबी उम्र के लिए रखती हैं। इसकी प्रचलित कथा है कि दिवाली से पहले एक स्त्री मिट्टी लेने जंगल गई। खुदाई करते समय अनजाने में उससे एक जंगली जानवर का बच्चा मर गया। कुछ ही समय में उसके परिवार पर दुख आ पड़ा, और उसे समझ आया कि अनजाने में हुए उस काम से कितनी पीड़ा हुई है। उसने सच्चे मन से प्रार्थना की, अष्टमी का व्रत रखा और क्षमा माँगी। पश्चाताप और पूजा के बल पर उसकी संतान फिर से सुखी और स्वस्थ हो गई। इसी कथा से इस व्रत में माँ की चिंता, हर जीव के प्रति ज़िम्मेदारी, और यह भाव जुड़ा है कि अनजाने में हुई भूल को पश्चाताप और करुणा भरे काम से सुधारा जा सकता है। महिलाएँ अहोई माता की पूजा करती हैं, उनका चित्र बनाती हैं या प्रतिमा रखती हैं, प्रार्थना में अपनी संतान को गिनती या याद करती हैं, और परंपरा के अनुसार तारे देखकर या परिवार की रीति के हिसाब से व्रत पूरा करती हैं।
महत्व
अहोई अष्टमी का महत्व भक्ति में, पारिवारिक परंपरा में और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।
उपवास
व्रत सूर्योदय से तारे दिखने तक रखा जाता है, और कुछ परिवारों में चाँद दिखने तक। करवा चौथ का सँभालकर रखा करवा लेकर उससे जल अर्पित करके व्रत खोला जाता है।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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