
दिवसभारत · राज्य दिवस
केरल पिरवी
Kerala Piravi
अगली तारीख़
रविवार, 1 नवंबर 2026
- सूर्योदय के समय की तिथि
- कृष्ण सप्तमी14:52 तक
- नक्षत्र
- पुष्यअगले दिन 04:30 तक
- मास
- कार्तिकअमांत पंचांग में आश्विन
- सूर्योदय
- 06:43सूर्यास्त 18:02
संक्षेप में
केरल पिरवी यानी ‘केरल का जन्म’ 1 नवंबर 1956 को आज के केरल राज्य के बनने की याद में मनाया जाता है, और उससे पहले आज़ादी के बाद से मलयालम भाषी इलाक़े त्रावणकोर-कोचीन राज्य, मद्रास राज्य के मालाबार ज़िले और आसपास के कुछ क्षेत्रों में बँटे हुए थे।
कथा
केरल पिरवी का अर्थ है ‘केरल का जन्म’। 1 नवंबर 1956 को आज का केरल राज्य बना था, और यह दिन उसी की याद में मनाया जाता है। आज़ादी के बाद मलयालम भाषी इलाक़े एक राज्य में नहीं थे। वे त्रावणकोर-कोचीन राज्य, मद्रास राज्य के मालाबार ज़िले और आसपास के कुछ क्षेत्रों में बँटे हुए थे। भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन हुआ, तो इनमें से ज़्यादातर मलयालम भाषी इलाक़ों को मिलाकर केरल बनाया गया। साथ ही दक्षिण के कुछ तमिल भाषी इलाक़े उस राज्य में चले गए, जो आगे चलकर तमिलनाडु कहलाया। इसलिए यह दिन मलयालम भाषा, केरल की अपनी पहचान और वहाँ के सामाजिक इतिहास से गहराई से जुड़ा है। स्कूल, सार्वजनिक संस्थाएँ और सांस्कृतिक संगठन इस दिन आम तौर पर मलयालम साहित्य के कार्यक्रम करते हैं। लोग पारंपरिक पोशाक पहनते हैं, संगीत और नृत्य होते हैं, और राज्य की विरासत और विकास पर चर्चाएँ होती हैं। यह दिन केरल के अलग-अलग इलाक़ों, समुदायों और परंपराओं को जोड़ने वाली साझी संस्कृति की ख़ुशी मनाने का दिन है।
महत्व
केरल पिरवी भारत के किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति, संस्था, घटना या सार्वजनिक मूल्य को याद करने का दिन है।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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