
व्रतभारतीय · हिंदू
अक्षय नवमी
Akshaya Navami · आंवला नवमी; सत्य युगादि
अगली तारीख़
बुधवार, 18 नवंबर 2026
संक्षेप में
कार्तिक शुक्ल नवमी को आने वाली अक्षय नवमी हिंदू पंचांग का व्रत है, और इसकी तारीख़ व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।
कथा
अक्षय नवमी को आंवला नवमी भी कहते हैं। यह कार्तिक शुक्ल नवमी को आती है। अक्षय का अर्थ है जो कभी कम न हो। इस दिन इसी भाव को पूजा, दान और आंवले के पेड़ से जोड़ा जाता है। वैष्णव परंपरा में यह समय ब्रज की पवित्र भूमि और वहाँ की परिक्रमा या तीर्थयात्रा से भी जुड़ा है। बहुत से घरों में आंवले के पेड़ को जीवन देने वाला, औषधीय गुणों वाला और शुभ मानकर पूजा जाता है। परिवार पेड़ के पास भोजन बनाते हैं या साथ बैठकर खाते हैं, और दूसरों को भी खिलाते हैं। यह दिन कार्तिक के पवित्र शुक्ल पक्ष में आता है। दीवाली के त्योहारों के बाद और देवउठनी एकादशी व तुलसी विवाह जैसे कार्तिक के आगे के त्योहारों से पहले यह नवमी पड़ती है। इसलिए इस दिन प्रकृति के प्रति कृतज्ञता जताई जाती है, ऐसे सत्कर्म किए जाते हैं जिनका पुण्य कभी ख़त्म न हो, और अपने लिए जोड़ने के बजाय दूसरों को देने की उदारता सीखी जाती है।
महत्व
अक्षय नवमी का महत्व भक्ति में, परिवार की परंपरा में और इस दिन के आध्यात्मिक या ऋतु से जुड़े अर्थ में है।
कैसे मनाते हैं
आंवले के पेड़ को जल चढ़ाया जाता है, उसके चारों ओर धागा लपेटा जाता है, और उसी के नीचे भोजन पकाकर खाया जाता है। जो भी आए, उसके लिए भी कुछ रख दिया जाता है।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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