
जयंतीभारतीय · हिंदू
अन्नपूर्णा जयंती
Annapurna Jayanti
अगली तारीख़
गुरुवार, 24 दिसंबर 2026
- सूर्योदय के समय की तिथि
- कृष्ण एकमअगले दिन 03:07 तक
- नक्षत्र
- आर्द्राअगले दिन 01:46 तक
- मास
- पौषअमांत पंचांग में मार्गशीर्ष
- सूर्योदय
- 07:16सूर्यास्त 18:01
संक्षेप में
अन्नपूर्णा जयंती हिंदू पंचांग के अनुसार मनाई जाने वाली जयंती है, जिसकी तिथि और रीति-रिवाज इलाक़े और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।
कथा
अन्नपूर्णा जयंती पर माँ अन्नपूर्णा की पूजा होती है। माँ अन्नपूर्णा, माँ पार्वती का वह रूप हैं जो सबका पोषण करता है। अन्नपूर्णा नाम का अर्थ है अन्न से भरी हुई, या पोषण देने वाली। शैव परंपरा की एक प्रसिद्ध कथा है कि एक बार भगवान शिव ने कहा कि यह भौतिक संसार माया है। तब माँ पार्वती ने संसार से अन्न और पोषण वापस ले लिया, और दिखाया कि भौतिक चीज़ों को व्यर्थ मान लें तो देहधारी जीवन चल ही नहीं सकता। चारों ओर भूख फैल गई। तब माँ काशी में अन्नपूर्णा रूप में प्रकट हुईं और सबको भोजन कराया। भगवान शिव स्वयं भी भिक्षापात्र लेकर उनके पास आए। यह कथा किसी को भोजन कराने को पवित्र कर्म बना देती है, और सिखाती है कि आध्यात्मिक जीवन शरीर की बुनियादी ज़रूरतों की देखभाल से अलग नहीं है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा को भक्त माँ अन्नपूर्णा की पूजा करते हैं, पका हुआ भोजन और अनाज चढ़ाते हैं और अन्नदान करते हैं। रसोई और भोजन कृतज्ञता के स्थान बन जाते हैं। परिवारों को याद रहता है कि अन्न बर्बाद न करें और जो भरपूर है उसे दूसरों के साथ बाँटें।
महत्व
अन्नपूर्णा जयंती का महत्व भक्ति में, पारिवारिक परंपरा में और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।
कैसे मनाते हैं
चूल्हे को साफ़ करके उस पर शुभ चिह्न बनाए जाते हैं, और उस पर नया अनाज रखा जाता है। घर में कोई भी खाना खाने से पहले अन्नदान किया जाता है।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
तिथि कैलेंडर आपके फ़ोन में
आपके अपने शहर का पंचांग, चौघड़िया, त्योहार और रिमाइंडर। ऐप इंटरनेट के बिना भी चलता है।