
क्षेत्रीयगुजराती · हिंदू
आषाढी बीज
Ashadhi Beej · Kutchi New Year
अगली तारीख़
सोमवार, 5 जुलाई 2027
- सूर्योदय के समय की तिथि
- शुक्ल द्वितीयाअगले दिन 01:13 तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु09:19 तक
- मास
- आषाढ
- सूर्योदय
- 05:57सूर्यास्त 19:30
संक्षेप में
आषाढी बीज हिंदू पंचांग के अनुसार मनाया जाने वाला क्षेत्रीय त्योहार है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।
कथा
आषाढी बीज कच्छी समाज का पारंपरिक नया साल है। यह मानसून की शुरुआत में आता है, जब कच्छ की सूखी धरती का रंग बदलने लगता है और किसान बारिश, बुआई और खेती के नए मौसम की राह देखते हैं। इसी दिन से कच्छी साल क्यों शुरू होता है, इस बारे में कच्छ में एक से ज़्यादा ऐतिहासिक मान्यताएँ हैं। कुछ मान्यताएँ इसे कच्छ के पुराने राजाओं से जोड़ती हैं, तो कुछ मानसून को नए जीवन का संकेत मानने की इस इलाक़े की रीत से। मान्यता कोई भी हो, इस परंपरा की जड़ें कच्छ की धरती और कच्छी पहचान में गहरी हैं। परिवार एक-दूसरे को नए साल की शुभकामनाएँ देते हैं, लापसी जैसे त्योहार के पकवान बनाते हैं, मंदिर जाते हैं, और अच्छी बारिश और समृद्धि की आशा के साथ मौसम की शुरुआत करते हैं। कच्छ से बाहर बसे कच्छियों के लिए भी आषाढी बीज अपने वतन, भाषा और मानसून पर टिके जीवन से जुड़ने का अहम मौक़ा है।
Gujarati household practice के आधार पर
महत्व
आषाढी बीज का महत्व भक्ति, परिवार की परंपरा और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।
Gujarati household practice के आधार पर
कैसे मनाते हैं
इस दिन सुबह हवा देखी जाती है। हवा की दिशा से अनुमान लगाया जाता है कि इस साल बारिश कैसी होगी, और यह अनुमान इतनी गंभीरता से लिया जाता है कि छपता भी है। कच्छी परिवार एक-दूसरे को शुभकामनाएँ देते हैं। इस दिन कच्छ में सार्वजनिक छुट्टी होती है, गुजरात में और कहीं नहीं।
Gujarati household practice के आधार पर
अलग-अलग इलाक़ों में
कच्छ और देश-विदेश में बसे कच्छी इसी दिन से नया साल गिनते हैं, जबकि बाक़ी गुजरात का नया साल कार्तिक में बेसतु वरस से शुरू होता है। इसी तिथि को पुरी और अहमदाबाद में रथयात्रा निकलती है।
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यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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