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भाई दूज

Bhai Bij

अगली तारीख़

बुधवार, 11 नवंबर 2026

56 दिन बाद
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संक्षेप में

दीवाली के बाद कार्तिक शुक्ल द्वितीया को आने वाला भाई दूज भाई-बहन के स्नेह का त्योहार है।

कथा

भाई दूज, जिसे भाई बीज या यम द्वितीया भी कहते हैं, भाई-बहन के स्नेह और एक-दूसरे की कुशलता की कामना का त्योहार है। प्रचलित कथा है कि यमुना जी अपने भाई, मृत्यु के देवता यमराज को बार-बार अपने घर आने का न्योता देती थीं। आख़िरकार कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज बहन के घर पहुँचे। यमुना जी ने उन्हें तिलक लगाया, प्रेम से भोजन कराया और मन से आवभगत की। बहन का स्नेह देखकर यमराज प्रसन्न हुए और वरदान दिया कि इस दिन जिस भाई को बहन से ऐसा सच्चा स्वागत और प्रार्थना मिले, उसका कल्याण हो। इसी कथा से इस दिन का पारंपरिक नाम यम द्वितीया पड़ा। गुजराती परिवारों में बहन भाई को घर बुलाती है, आरती उतारती है या तिलक लगाती है, मिठाई खिलाकर भोजन कराती है और भाई की लंबी, स्वस्थ उम्र की प्रार्थना करती है। भाई उपहार देकर अपना स्नेह जताता है। रक्षाबंधन की तरह यह रिवाज भी समय के साथ परिवार में एक-दूसरे का ख़याल रखने का दिन बन गया है। फिर भी दीवाली के त्योहारों के समापन पर आने वाले भाई दूज का अपना अलग स्थान है।

Gujarati household practice के आधार पर

महत्व

भक्ति, पारिवारिक परंपरा और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ के कारण भाई दूज का महत्व है।

कैसे मनाते हैं

इस दिन बहन भाई के घर नहीं जाती, बल्कि भाई बहन के घर जाता है और वहीं भोजन करता है। बहन भाई को तिलक लगाकर आरती उतारती है, और भाई उसे उपहार देता है। जहाँ भाई या बहन न हो, वहाँ चंद्रमा को ही भाई या बहन मान लिया जाता है। यही इस रिवाज का पुराना रूप है।

Gujarati household practice के आधार पर

अलग-अलग इलाक़ों में

उत्तर भारत में यह त्योहार भाई दूज, महाराष्ट्र में भाऊ बीज और बंगाल में भाई फोंटा के नाम से मनाया जाता है। बंगाल में जब तक तिलक नहीं हो जाता, बहन उपवास रखती है। श्रावण में आने वाला रक्षाबंधन इसी रिश्ते का दूसरा हिस्सा है, पर वह बहन के नहीं, भाई के घर मनाया जाता है।

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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