सभी त्योहार

त्योहारसिख

बंदी छोड़ दिवस

Bandi Chhor Divas

अगली तारीख़

रविवार, 8 नवंबर 2026

53 दिन बाद
सूर्योदय के समय की तिथि
कृष्ण चतुर्दशी11:28 तक
नक्षत्र
स्वातिअगले दिन 07:23 तक
मास
कार्तिकअमांत पंचांग में आश्विन
सूर्योदय
06:47सूर्यास्त 17:59
उस दिन का पंचांग खोलें

इस परंपरा के जानकार चित्र की जाँच न कर लें, तब तक वह यहाँ नहीं दिखाया जाता।

संक्षेप में

बंदी छोड़ दिवस पर सिख गुरु हरगोबिंद साहिब के क़ैद से छूटकर अमृतसर लौटने को याद करते हैं, और सिख परंपरा बताती है कि जब मुग़ल बादशाह गुरु जी को छोड़ने को राज़ी हुए, तो क़ैद में उनकी संगत को ही अपना सहारा मानने वाले दूसरे राजाओं को पीछे छोड़कर गुरु जी अकेले बाहर आने को तैयार नहीं हुए।

कथा

सिख परंपरा में बंदी छोड़ दिवस गुरु हरगोबिंद साहिब की क़ैद से रिहाई और अमृतसर वापसी की याद का दिन है। कथा है कि मुग़ल बादशाह गुरु जी को छोड़ने को तैयार हो गए, पर गुरु जी ने अकेले बाहर आने से मना कर दिया। उनके साथ दूसरे राजा भी क़ैद थे, और वे सब गुरु जी की संगत को ही अपना सहारा मानने लगे थे। आख़िर यह रास्ता निकला कि गुरु जी के लिए ख़ास चोला बनवाया गया, और उसके फुँदने पकड़ सकने वाले सभी क़ैदी उनके साथ छूट सकते थे। इस तरह 52 राजा गुरु जी के साथ क़ैद से बाहर आए। तभी से गुरु जी बंदी छोड़, यानी क़ैदियों को छुड़ाने वाले, कहलाए। गुरु जी अमृतसर पहुँचे तो दीयों और उत्सव के दिन चल रहे थे, और इस दिन स्वर्ण मंदिर की रोशनी दूर-दूर तक मशहूर है। यह दिन सिखाता है कि ख़ुद छूट जाना काफ़ी नहीं है। दूसरे बंधन में हों और हम उन्हें भूल जाएँ, तो वह मुक्ति अधूरी है। गुरुद्वारों में इस दिन कीर्तन, अरदास, सेवा और संगत होती है।

Gujarati household practice के आधार पर

महत्व

बंदी छोड़ दिवस मनाने वाले सिख समाज के लिए यह दिन बहुत मायने रखता है, और धर्म, परिवार व संस्कृति की परंपरा को पीढ़ी दर पीढ़ी बनाए रखता है।

कैसे मनाते हैं

अमृतसर में स्वर्ण मंदिर रोशनी से जगमगाता है और सरोवर के ऊपर आतिशबाज़ी होती है। दूसरी जगहों पर गुरुद्वारों में कीर्तन और लंगर होता है। घरों में दीये तो दिवाली जैसे ही जलते हैं, पर उनके पीछे की वजह अलग है। बंदी छोड़ का अर्थ है क़ैदियों की रिहाई, और सिख चाहते हैं कि यह दिन इसी नाम से पुकारा जाए।

Gujarati household practice के आधार पर

अलग-अलग इलाक़ों में

यह दिन दिवाली की अमावस्या को ही पड़ता है, और स्वर्ण मंदिर में साल की सबसे बड़ी रोशनी इसी रात होती है। सिख इसे दिवाली के रूप में नहीं, बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाते हैं, और यह फ़र्क़ जान-बूझकर रखा जाता है। दीये वही हैं, पर वजह अलग है।

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

तिथि कैलेंडर आपके फ़ोन में

आपके अपने शहर का पंचांग, चौघड़िया, त्योहार और रिमाइंडर। ऐप इंटरनेट के बिना भी चलता है।