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व्रतगुजराती · हिंदू

बोल चौथ

Bol Choth · Bahula Chaturthi

अगली तारीख़

शुक्रवार, 20 अगस्त 2027

सूर्योदय के समय की तिथि
कृष्ण तृतीया18:53 तक
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपदा07:38 तक
मास
भाद्रपदअमांत पंचांग में श्रावण
सूर्योदय
06:16सूर्यास्त 19:09
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संक्षेप में

बोल चौथ हिंदू पंचांग के अनुसार रखा जाने वाला व्रत है, जिसकी तिथि और रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।

कथा

बोल चौथ गुजरात का व्रत है, जिसके केंद्र में गाय और बछड़े के प्रति श्रद्धा है। गुजरात में यह नाग पंचमी और जन्माष्टमी के त्योहारों से कुछ ही पहले आती है। परंपरा से विवाहित स्त्रियाँ इस दिन बछड़े सहित गाय की पूजा करती हैं, और बच्चों व परिवार की सेहत और रक्षा के लिए प्रार्थना करती हैं। इसकी एक प्रचलित लोककथा बछड़े के प्रति लापरवाही से सावधान करती है। कथा में किसी ग़लतफ़हमी या लापरवाही से एक छोटे बछड़े को नुकसान पहुँचता है, और घर में दुख और पछतावा छा जाता है। भूल मानकर सच्चे मन से पूजा करने के बाद घर में फिर से सुख लौट आता है। ज़बानी सुनाई जाने वाली इस कथा के ब्योरे अलग-अलग मिलते हैं, पर इसका सार वही रहता है कि पशु के जीवन का आदर हो, माँ की ममता समझी जाए और ज़िम्मेदारी निभाई जाए। कई घरों में पारिवारिक रिवाज के अनुसार कुछ अनाजों से बने पकवान नहीं खाए जाते, या गाय के दूध से बनी चीज़ें इस्तेमाल नहीं की जातीं। पूजा के बाद सादा भोजन किया जाता है। यह व्रत गुजरात की घरेलू व्रत परंपरा का ख़ास हिस्सा है, जहाँ रोज़ का पारिवारिक जीवन, पशुपालन और भक्ति आपस में गुँथे हुए हैं।

Gujarati household practice के आधार पर

महत्व

बोल चौथ का महत्व भक्ति में, पारिवारिक परंपरा में और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।

Gujarati household practice के आधार पर

कैसे मनाते हैं

इस दिन गेहूँ नहीं पीसा जाता और किसी भी चीज़ पर चाकू नहीं चलाया जाता। इसलिए खाना उन्हीं चीज़ों से बनता है जिन्हें काटना न पड़े। गोधूलि वेला में गाय और बछड़े की पूजा होती है। व्रत-त्योहारों की जो कड़ी शीतला सातम पर पूरी होती है, वह इसी दिन से शुरू होती है।

Gujarati household practice के आधार पर

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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