
त्योहारभारतीय · हिंदू
बोनालू
Bonalu
अभी कोई नियम नहीं
इसका नियम अभी किसी ने नहीं लिखा है, इसलिए कैलेंडर इसे किसी तारीख़ पर नहीं दिखाता। मनगढ़ंत तारीख़ के साथ नाम दिखाने से अच्छा है कि सिर्फ़ नाम दिखे।
संक्षेप में
बोनालू हिंदू पंचांग के अनुसार मनाया जाने वाला त्योहार है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।
कथा
बोनालू तेलंगाना का बड़ा त्योहार है, जिसमें महाकाली और देवी माँ के दूसरे स्थानीय रूपों की भक्ति होती है। हैदराबाद में प्रचलित परंपरा के अनुसार आज इस त्योहार की जो धूम है, उसकी जड़ उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में फैली एक महामारी में है। कथा है कि उज्जैन में तैनात हैदराबाद के सैनिकों ने बीमारी से छुटकारे के लिए महाकाली से प्रार्थना की। लौटकर उन्होंने आभार में देवी की पूजा शुरू की और 'बोनम' चढ़ाया। 'बोनालू' नाम 'भोजनम्' से, यानी भोजन के चढ़ावे से, जुड़ा माना जाता है। महिलाएँ सजे हुए घड़ों में पके चावल, दूध या गुड़ लेकर मंदिर जाती हैं और देवी को अर्पित करती हैं। घड़े के ऊपर अक्सर नीम की पत्तियाँ और दीया होता है। अमांत पंचांग के आषाढ महीने में, एक के बाद एक रविवार को, त्योहार एक प्रमुख मंदिर से दूसरे मंदिर तक पहुँचता है। साथ में ढोल बजते हैं, जुलूस निकलते हैं, पोथुराजु का नाच होता है और लोग इकट्ठा होते हैं। बोनालू के मूल में आभार है, बीमारी और विपदा से रक्षा की प्रार्थना है, और मोहल्ले-मोहल्ले के लोगों और देवी के उग्र, रक्षा करने वाले रूप के बीच का अपनापन है।
Gujarati household practice के आधार पर
महत्व
बोनालू का महत्व भक्ति, परिवार की परंपरा और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ में है।
कैसे मनाते हैं
दूध और गुड़ डालकर पकाए चावल सजे हुए घड़े में भरकर सिर पर ले जाए जाते हैं। घड़े के ऊपर नीम की पत्तियाँ, हल्दी और दीया रखा जाता है। बोनालू की शुरुआत गोलकुंडा के मंदिर से होती है। फिर लाल दरवाज़ा और उज्जैनी महांकाली में अपने-अपने रविवार को बोनालू मनाया जाता है, इसीलिए कोई एक नियम इसकी तारीख़ तय नहीं कर पाता। अगली सुबह रंगम होता है, जिसमें घड़े पर खड़े होकर भविष्यवाणी की जाती है।
Gujarati household practice के आधार पर
अलग-अलग इलाक़ों में
बोनालू का केंद्र हैदराबाद और सिकंदराबाद है। यह किसी एक तारीख़ को नहीं पड़ता, बल्कि कई हफ़्तों तक एक मंदिर से दूसरे मंदिर तक चलता है। पहले गोलकुंडा, फिर सिकंदराबाद की उज्जैनी महांकाली, और फिर पुराना शहर।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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