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डाकोर पूनम मेला

Dakor Purnima Mela · फागुन पूर्णिमा मेला

अगली तारीख़

सोमवार, 22 मार्च 2027

सूर्योदय के समय की तिथि
पूर्णिमा16:13 तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी20:45 तक
मास
फाल्गुन
सूर्योदय
06:41सूर्यास्त 18:52
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संक्षेप में

फाल्गुन पूर्णिमा पर लोग रणछोड़राय के दर्शन को डाकोर पैदल जाते हैं, ज़्यादातर रात भर चलकर।

कथा

डाकोर में भगवान श्रीकृष्ण रणछोड़राय के रूप में विराजते हैं, यानी रण छोड़कर जाने वाले श्रीकृष्ण। वे डाकोर कैसे पधारे, इसकी कथा किसी राजा की नहीं, एक भक्त की है। डाकोर के बोडाणा दशकों तक हर छह महीने पैदल द्वारका जाते रहे। उम्र ढलने पर यह संभव नहीं रहा, तब मान्यता है कि भगवान ख़ुद उनकी बैलगाड़ी में बैठकर डाकोर आ गए। द्वारका से मूर्ति वापस माँगी गई, तो मूर्ति के वज़न के बराबर सोना देने की शर्त रखी गई। बोडाणा की पत्नी के पास बस एक नथ थी, और तराज़ू में वही नथ मूर्ति के बराबर भारी निकली। फाल्गुन पूर्णिमा पर डाकोर जाने वाले रास्ते ध्वजा लेकर चलते संघों से भर जाते हैं। इनमें से ज़्यादातर लोग अहमदाबाद, नडियाद और उससे भी दूर से रात भर चलकर पहुँचे होते हैं।

महत्व

इस मेले में पदयात्रा ही भक्ति है। पूर्णिमा की सुबह बस से पहुँचना दर्शन भर है, पर भोर में ध्वजा लेकर पैदल डाकोर में प्रवेश करना ही असली मेला है।

कैसे मनाते हैं

पदयात्री मंदिर में चढ़ाने के लिए ध्वजा लेकर चलते हैं, और दर्शन से पहले गोमती तालाब में स्नान करते हैं।

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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