
जयंतीभारतीय · हिंदू
दत्तात्रेय जयंती
Dattatreya Jayanti
अगली तारीख़
बुधवार, 23 दिसंबर 2026
- सूर्योदय के समय की तिथि
- शुक्ल चतुर्दशी10:47 तक
- नक्षत्र
- रोहिणी07:56 तक
- मास
- मार्गशीर्ष
- सूर्योदय
- 07:15सूर्यास्त 18:01
संक्षेप में
दत्तात्रेय जयंती हिंदू पंचांग के अनुसार मनाई जाने वाली जयंती है, और इसकी तारीख़ व रीति-रिवाज इलाक़े और स्थानीय पंचांग के हिसाब से अलग हो सकते हैं।
कथा
दत्तात्रेय जयंती पर भगवान दत्तात्रेय का स्मरण और पूजन होता है। वे गुरु-रूप में पूजे जाते हैं, और उनमें ब्रह्मा, विष्णु और शिव, तीनों के तत्त्व एक साथ माने जाते हैं। पुराणों में उन्हें अत्रि ऋषि और पतिव्रता अनसूया जी का पुत्र बताया गया है। प्रसिद्ध कथा है कि तीनों देवों ने अनसूया जी के सतीत्व की परीक्षा ली। पर उनके तपोबल और पवित्रता से वह परीक्षा वरदान में बदल गई, और तीनों देवों के स्वरूप बालक दत्तात्रेय में एक हो गए। बाद की परंपराओं में दत्तात्रेय ख़ास तौर पर ऐसे अवधूत और गुरु के रूप में याद किए जाते हैं, जो पूरे संसार से सीखते हैं। भागवत परंपरा में उनके चौबीस गुरुओं की कथा आती है। पृथ्वी और वायु से लेकर प्राणियों और रोज़मर्रा के जीवन के साधारण अनुभवों तक, सबसे उन्होंने कुछ न कुछ सीखा। इसका अर्थ है कि सजग साधक के लिए ज्ञान हर जगह है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा को भक्त भगवान दत्तात्रेय की पूजा करते हैं, और गुरु-तत्त्व, सादगी और आत्मज्ञान की महिमा गाते हैं।
महत्व
भक्ति, पारिवारिक परंपरा और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक या मौसमी अर्थ के कारण दत्तात्रेय जयंती का महत्व है।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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