
व्रतगुजराती · हिंदू
ढुंढिराज चतुर्थी
Dhundhiraja Chaturthi · ढुंढि गणपति चौथ
अगली तारीख़
शुक्रवार, 12 मार्च 2027
- सूर्योदय के समय की तिथि
- शुक्ल चतुर्थी14:57 तक
- नक्षत्र
- अश्विनी11:22 तक
- मास
- फाल्गुन
- सूर्योदय
- 06:50सूर्यास्त 18:48
संक्षेप में
ढुंढिराज चतुर्थी हिंदू पंचांग के अनुसार रखा जाने वाला व्रत है, और इसकी तिथि व रीति-रिवाज क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।
कथा
ढुंढिराज चतुर्थी गणेश जी की एक ख़ास नाम वाली चतुर्थी है, जो गुजराती और दूसरे क्षेत्रीय पंचांगों में मिलती है। ढुंढिराज गणेश जी का पुराना नाम है, और यह ख़ास तौर पर काशी में प्रसिद्ध है। वहाँ ढुंढिराज रूप की पूजा ऐसे रक्षक के रूप में होती है, जो दूसरी तीर्थ यात्राओं और अनुष्ठानों से पहले विघ्न दूर करते हैं। परंपरा में इस नाम को ऐसे देवता से जोड़ा जाता है, जिन्हें ‘ढूँढ़कर’ पहचाना गया और जिन्होंने उपद्रवी शक्तियों पर विजय पाई। इस चतुर्थी पर भक्त गणेश जी को दूर्वा, लाल फूल, मोदक या दूसरी मिठाई चढ़ाकर पूजा करते हैं, और उनके नामों व स्तुतियों का पाठ करते हैं। साल में एक बार आने वाले गणेश चतुर्थी के बड़े त्योहार के सामने यह दिन बहुत छोटा है। फिर भी यह हिंदू पंचांग की एक अहम बात को बचाए रखता है। अलग-अलग चतुर्थियाँ गणेश जी के अलग-अलग रूपों और नामों की याद दिलाती हैं, और हर एक में यही भाव है कि कोई भी नया काम शुरू करने से पहले सबसे पहले गणेश जी को याद किया जाए।
महत्व
ढुंढिराज चतुर्थी का महत्व भक्ति, परिवार की परंपरा और इस दिन से जुड़े आध्यात्मिक व मौसमी अर्थ में है।
यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।
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