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ईद-उल-फ़ित्र

Eid al-Fitr

अभी कोई नियम नहीं

इसका नियम अभी किसी ने नहीं लिखा है, इसलिए कैलेंडर इसे किसी तारीख़ पर नहीं दिखाता। मनगढ़ंत तारीख़ के साथ नाम दिखाने से अच्छा है कि सिर्फ़ नाम दिखे।

संक्षेप में

रमज़ान में जिन वयस्क मुसलमानों की सेहत साथ दे, वे पूरे महीने भोर से सूर्यास्त तक बिना कुछ खाए-पिए रोज़े रखते हैं और नमाज़, संयम, दान व क़ुरआन पर ख़ास ध्यान देते हैं, और यह महीना पूरा होने पर ईद-उल-फ़ित्र मनाई जाती है।

कथा

ईद-उल-फ़ित्र रमज़ान के रोज़ों का महीना पूरा होने पर आती है। रमज़ान में जिन वयस्क मुसलमानों की सेहत साथ दे, वे भोर से सूर्यास्त तक न कुछ खाते हैं, न पीते हैं। इस महीने नमाज़, संयम, दान और क़ुरआन पर ख़ास ध्यान दिया जाता है। अगला चंद्र मास शव्वाल शुरू होने की पुष्टि होते ही ईद आ जाती है। ईद की सामूहिक नमाज़ से पहले मुसलमान ज़कात-अल-फ़ित्र देते हैं। यह धर्म में तय किया गया दान है, ताकि ज़रूरतमंद लोग भी ईद की ख़ुशी में शामिल हो सकें। ईद की सुबह लोग नहाकर अच्छे कपड़े पहनते हैं, ख़ास नमाज़ के लिए इकट्ठा होते हैं और एक-दूसरे को मुबारकबाद देते हैं। फिर घरों में मेहमानों का आना-जाना, दावतें और मिठाइयाँ चलती हैं। दक्षिण एशिया में सेवइयाँ जैसे पकवान ख़ास तौर पर इस दिन की पहचान हैं। ईद ख़ुशी का त्योहार है, पर यह ख़ुशी महीने भर के संयम से निकलती है। रमज़ान पूरा होने पर अल्लाह का शुक्र अदा करने का यह दिन है। महीने भर हर किसी ने अपने-अपने रोज़े रखे, और ईद पर वही संयम उदारता, परिवार और समाज के रिश्तों को नई ताक़त देता है।

Gujarati household practice के आधार पर

महत्व

ईद-उल-फ़ित्र मनाने वाले समाज के लिए यह दिन बहुत मायने रखता है, और धर्म, परिवार व संस्कृति की परंपरा को पीढ़ी दर पीढ़ी बनाए रखता है।

कैसे मनाते हैं

सुबह ईदगाह या मस्जिद में ईद की सामूहिक नमाज़ पढ़ी जाती है। उससे पहले ज़कात-अल-फ़ित्र दे दी जाती है, ताकि हर कोई ईद मना सके। नए कपड़े पहने जाते हैं, लोग एक-दूसरे के घर मिलने जाते हैं, और भारत के ज़्यादातर घरों में शीर ख़ुरमा बनता है। अहमदाबाद और सूरत में ईद की तैयारी के लिए रमज़ान की आख़िरी रातों में बाज़ार रात भर खुले रहते हैं।

Gujarati household practice के आधार पर

अलग-अलग इलाक़ों में

ईद की तारीख़ नया चाँद दिखने पर निर्भर करती है। इसलिए अलग-अलग देशों में, और एक ही शहर की मस्जिदों में भी, ईद एक दिन आगे-पीछे हो सकती है। सऊदी अरब, इंडोनेशिया, तुर्की और भारतीय उपमहाद्वीप में ईद हमेशा एक ही दिन नहीं होती। छपे हुए कैलेंडर की तारीख़ भी चाँद दिखने तक अनुमान ही मानी जाती है।

यह जानकारी अभी किसी जानकार ने जाँची नहीं है।

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